ना सोएंगे- ना सोने देंगे : जनता का काम ना करने वाले 8,942 अधिकारियों को सीएम का नोटिस, जाएगी नौकरी..?
अब तक सहयोग शिविर कार्यक्रम से संबंधित 8,942 पदाधिकारियों को पहला नोटिस, 153 पदाधिकारियों को दूसरा नोटिस, जबकि एक पदाधिकारी को तीसरा नोटिस मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्गत किया गया है।
DESWA DESK : जनता का काम ना कर उन्हें टरकाने वाले अधिकारियों के लिए बुरी खबर है। अब तो जो सरकारी नौकरी को अपनी जागीर समझते थे, उनपर अब निलंबन की कार्रवाई शुरू हो गई है। अब तक सहयोग शिविर कार्यक्रम से संबंधित 8,942 पदाधिकारियों को पहला नोटिस, 153 पदाधिकारियों को दूसरा नोटिस, जबकि एक पदाधिकारी को तीसरा नोटिस मुख्यमंत्री कार्यालय से निर्गत किया गया है।
सहयोग शिविर कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों के 10 दिन बाद यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है तो पहली नोटिस, जबकि 21वें दिन दूसरी नोटिस और 25 वें दिन बाद तीसरी नोटिस जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि आवेदन का निष्पादन 30 दिनों में नहीं होता है तो संबंधित पदाधिकारी 31 वें स्वतः निलंबित हो जाएंगे।
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी आज कैमूर जिले के भगवानपुर प्रखंड के पहाड़िया पंचायत स्थित मां मुंडेश्वरी धाम धर्मशाला के समीप आयोजित सहयोग शिविर में शामिल हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने स्वयं आवेदकों से आवेदन प्राप्त कर उनकी समस्याएं भी सुनीं तथा 30 दिनों के अंदर उनके आवेदन निष्पादित होने का भरोसा दिया।
मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से शिलापट्ट अनावरण कर विभिन्न विभागों की 196.06 करोड़ रुपये लागत की 60 विकास योजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया। इनमें 162.69 करोड़ रुपये की लागत से 20 योजनाओं का शिलान्यास तथा 33.36 करोड़ रुपये की लागत से 40 योजनाओं का उद्घाटन शामिल है।
मुख्यमंत्री ने सहयोग शिविर कार्यक्रम से संबंधित आवेदकों के प्राप्त आवेदनों का निष्पादन पत्र, जमीन बंदोबस्ती प्रमाण पत्र, पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना, अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना आदि की स्वीकृत राशि का सांकेतिक चेक एवं प्रमाण पत्र लाभुकों को प्रदान किया।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमलोगों ने जनता की समस्याओं के समाधान के लिए करीब एक माह पहले 19 मई को सहयोग शिविर कार्यक्रम शुरू किया। सहयोग पोर्टल के माध्यम से भी लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा रहे हैं। अब तक पूरे बिहार से 3 लाख 3 हजार 678 आवेदन प्राप्त हुए हैं जिनमें से 2 लाख 61 हजार 628 आवेदनों का निष्पादन निर्धारित समय सीमा 30 दिनों के अंदर किया जा चुका है, जो प्राप्त आवदेनों का औसतन 90 प्रतिशत है।
सहयोग शिविर कार्यक्रम के माध्यम से प्राप्त होने वाले आवेदनों के 10 दिन बाद यदि कोई कार्रवाई नहीं होती है तो पहली नोटिस, जबकि 21वें दिन दूसरी नोटिस और 25 वें दिन बाद तीसरी नोटिस जारी की जाती है। इसके बावजूद यदि आवेदन का निष्पादन 30 दिनों में नहीं होता है तो संबंधित पदाधिकारी 31 वें स्वतः निलंबित हो जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के सभी 534 प्रखंडों के डिग्री कॉलेज में पढ़ाई की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है। राज्य में वैसे 211 प्रखंड है जहां डिग्री कॉलेज नहीं है, वहां जुलाई माह से डिग्री कॉलेज में पढ़ाई शुरू की जाएगी। हम लोग बिहार के सभी प्रखंडों में सरस्वती विद्या निकेतन के रूप में मॉडल स्कूल स्थापित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। अगले दो वर्षों के अंदर ऐसे मॉडल स्कूल स्थापित किए जाएंगे जिसमें नामांकन कराने के लिए अधिकारी से लेकर मंत्री तक के बच्चे उत्सुक होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सासाराम मां ताराचंडी और कैमूर मां मुंडेश्वरी भवानी से जुड़ा हुआ पवित्र स्थल है। इस इलाके में हेलीपैड विकसित किया जाएगा ताकि श्रद्धालु एवं पर्यटक आसानी से यहां आवागमन कर सकें। हमलोग बिहार की विरासत, महत्वपूर्ण धार्मिक एवं दर्शनीय स्थलों के भ्रमण के लिए हेलीकॉप्टर की सुविधा सुनिश्चित करने जा रहे हैं ताकि लोग अपने मन मुताबिक आसानी से बिहार का भ्रमण कर सकें।
उन्होंने कहा कि मां मुंडेश्वरी भवानी मंदिर का जीर्णोद्धार काफी समय से नहीं हुआ है। मां मुंडेश्वरी भवानी मंदिर का जीर्णोद्धार कराया जाएगा साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए यहां रोप-वे की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी। बरसात के बाद अगली बार जब मेरा यहां कार्यक्रम होगा तो रोप-वे लगाने के कार्य का शिलान्यास किया जाएगा। यहां स्थित माँ मुंडेश्वरी धाम धर्मशाला का अधिक से अधिक लोग इस्तेमाल करें, इसके लिए यहां जंगल सफारी तथा इको टूरिज्म को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में उद्योग स्थापित करने के लिए आवेदन देने वाले आवेदकों को 30 दिन के अंदर क्लीयरेंस मिलेगा। उद्योग स्थापित करने की दिशा में भी काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। सुशासन और अपराध मुक्त बिहार बना रहे, इसके लिए सरकार हर प्रकार से काम कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया भी सुनिश्चित की जा रही है। ऐसी व्यवस्था बनाई जा रही है कि महिला शिक्षकों को उनके गृह पंचायत के बगल वाले पंचायत में तथा पुरुष शिक्षकों को उनके गृह प्रखंड के बगल वाले प्रखंड में पदस्थापित किया जा सके।













