बुडको का ठेका लेने वाली 15 कंपनियां रडार पर, भ्रष्ट रिशुश्री से कनेक्शन की जांच कर रही ED को मिले अहम सुराग

बिहार में सरकारी ठेकों के आवंटन में हुए बड़े खेल को लेकर केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य के नगर विकास, जल संसाधन और भवन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्ट तरीके से टेंडर हथियाने वाली 15 प्रमुख कंपनियां अब  जांच एजेंसी की रडार पर आ गई हैं। ED को अंदेशा है कि इन कंपनियों को नियमों को ताक पर रखकर अरबों रुपये के ठेके आवंटित किए गए।

बुडको का ठेका लेने वाली 15 कंपनियां रडार पर, भ्रष्ट रिशुश्री से कनेक्शन की जांच कर रही ED को मिले अहम सुराग

DESWA DESK : बिहार में सरकारी ठेकों के आवंटन में हुए बड़े खेल को लेकर केंद्रीय प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। राज्य के नगर विकास, जल संसाधन और भवन निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भ्रष्ट तरीके से टेंडर हथियाने वाली 15 प्रमुख कंपनियां अब  जांच एजेंसी की रडार पर आ गई हैं। ED को अंदेशा है कि इन कंपनियों को नियमों को ताक पर रखकर अरबों रुपये के ठेके आवंटित किए गए।
जांच एजेंसी के रडार पर आईं इन कंपनियों के प्रबंधन, मालिकाना हक और शेयर होल्डरों की कुंडली खंगाली जा रही है, ताकि पर्दे के पीछे छिपे असली चेहरों और बेनामी संपत्तियों को बेनकाब किया जा सके।

बुडको से मिले सबसे ज्यादा ठेके

ED के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, रडार पर आईं इन 15 कंपनियों को नगर विकास एवं आवास विभाग की शीर्ष एजेंसी बुडको (बिहार शहरी आधारभूत संरचना विकास निगम) द्वारा सबसे अधिक काम सौंपे गए थे। इसके अलावा जल संसाधन विभाग और भवन निर्माण विभाग से भी इन कंपनियों को कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं मिली थीं।

रिशुश्री कनेक्शन आया सामने

इस पूरे महाघोटाले के तार कुख्यात रिशु श्री प्रकरण से सीधे जुड़ते नजर आ रहे हैं। ED की शुरुआती जांच में सामने आया है कि इन कंपनियों को बैकडोर से ठेके दिलाने में रिशु श्री ने मुख्य भूमिका निभाई थी।

रडार पर आईं प्रमुख कंपनियां

जांच के दायरे में आई कंपनियों में मुख्य रूप से रिलायबल एंटरप्राइजेज और रिलायबल इंफ्रा सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं, जो सीधे तौर पर रिशु श्री से जुड़ी हुई हैं। इसके अलावा बाकी की 13 कंपनियों को भी रिशु श्री के जरिए ही टेंडर मैनेज कराए जाने की पुख्ता आशंका है।

 2016 के बाद के सभी टेंडरों की जांच

घोटाले की गहराई को देखते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पिछले साल जून 2025 में ही इन संदिग्ध कंपनियों को चिह्नित कर लिया था। इसके बाद नगर विकास एवं आवास विभाग से इन्हें मिले सभी ठेकों की गोपनीय रिपोर्ट मांगी गई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। अब साल 2016 के बाद से लेकर अब तक इन कंपनियों को आवंटित की गईं सभी ठेका परियोजनाओं का पूरा ब्योरा तलब किया गया है।

वित्तीय अनियमितताओं को नजरअंदाज किया

 ED इस बात की जांच कर रही है कि टेंडर प्रक्रिया के दौरान किन-किन अधिकारियों ने वित्तीय अनियमितताओं को नजरअंदाज किया और इसके बदले में कितनी रकम का लेन-देन हुआ।

शेयर होल्डरों और मालिकों पर कसा शिकंजा

ED के सूत्रों ने बताया कि इन 15 कंपनियों का वित्तीय ढांचा बेहद पेचीदा है। कई कंपनियों में डमी (दिखावटी) डायरेक्टर और शेयर होल्डर बनाकर काले धन को सफेद करने का खेल खेला गया है। एजेंसी अब इस ब्योरे के आधार पर कंपनियों के वास्तविक मालिकों और बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के बैंक खातों तथा उनके निवेशों की कड़ियों को जोड़ रही है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई रसूखदार ठेकेदारों और विभागीय अधिकारियों पर ED का शिकंजा कसना तय माना जा रहा है।