बेगूसराय DTO ऑफिस बना भ्रष्टाचार का अड्डा! रिश्वत लेते बड़ा बाबू और दलाल गिरफ्तार

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई भले हो रही हो, लेकिन सच यही है कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वत लेने का धंधा अब रोज का सिस्टम बन चुका है। बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में...

बेगूसराय DTO ऑफिस बना भ्रष्टाचार का अड्डा! रिश्वत लेते बड़ा बाबू और दलाल गिरफ्तार

बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई भले हो रही हो, लेकिन सच यही है कि सरकारी दफ्तरों में रिश्वत लेने का धंधा अब रोज का सिस्टम बन चुका है। बेगूसराय जिला परिवहन कार्यालय (DTO) में बड़ा बाबू संजय कुमार और उसका दलाल शिवानंद ₹6 हजार रिश्वत लेते पकड़े गए, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि क्या सिर्फ दो लोगों की गिरफ्तारी से पूरा सिस्टम साफ हो जाएगा?

सच्चाई ये है कि आम आदमी बिना पैसे दिए सरकारी दफ्तरों में अपना काम कराने की सोच भी नहीं सकता। फाइल आगे बढ़ानी हो, गाड़ी ट्रांसफर कराना हो, लाइसेंस बनवाना हो या कोई प्रमाण पत्र लेना हो — हर जगह “सेवा शुल्क” के नाम पर खुलेआम वसूली चल रही है।

जनता को लूटने का काम

बेगूसराय DTO ऑफिस में जो हुआ, वो कोई नई घटना नहीं है। ये सिर्फ उस सड़े हुए सिस्टम की एक छोटी सी तस्वीर है, जहां भ्रष्ट अधिकारी, बाबू और दलाल मिलकर जनता को लूटने का काम कर रहे हैं। सरकारी कुर्सियां अब सेवा का नहीं, कमाई का जरिया बनती जा रही हैं।आम जनता घंटों लाइन में खड़ी रहती है, दफ्तरों के चक्कर काटती है, लेकिन काम तभी होता है जब जेब ढीली की जाए। सवाल ये है कि आखिर शासन और प्रशासन की आंखें कब खुलेंगी?

रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी

हर बार की तरह इस बार भी निगरानी विभाग ने ट्रैप बिछाया, रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तारी हुई, हाथ धुलवाए गए, पानी गुलाबी हुआ और FIR दर्ज हो गई लेकिन क्या इससे रिश्वतखोरी रुक जाएगी? अगर सिस्टम सच में ईमानदार होता, तो सरकारी दफ्तरों में दलाल खुलेआम घूमते नजर नहीं आते। जनता का काम कराने के नाम पर हर टेबल पर रेट तय नहीं होते। अफसरों और कर्मचारियों की मिलीभगत के बिना ये खेल सालों तक नहीं चल सकता।

“क्या ईमानदारी सिर्फ भाषणों में है?”

सबसे बड़ा सवाल अब शासन और प्रशासन की कार्यशैली पर उठ रहा है। आखिर क्यों हर विभाग में दलाल सक्रिय हैं? क्यों आम आदमी को अपने ही काम के लिए रिश्वत देनी पड़ती है? और क्यों कार्रवाई सिर्फ छोटे कर्मचारियों तक सीमित रह जाती है?जब तक भ्रष्ट अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई नहीं होगी, जब तक पूरे नेटवर्क को नहीं तोड़ा जाएगा, तब तक ऐसे ट्रैप सिर्फ खबर बनेंगे, सिस्टम नहीं बदलेंगे।जनता पूछ रही — “क्या ईमानदारी सिर्फ भाषणों में है?”

सरकार भ्रष्टाचार खत्म करने के लाख दावे करे, लेकिन जमीनी हकीकत यही है कि सरकारी दफ्तरों में बिना रिश्वत काम होना आज भी सबसे बड़ा चमत्कार माना जाता है। जनता अब जवाब चाहती है — आखिर कब खत्म होगा ये रिश्वतखोरी का खेल?

लगातार रिश्वत की मांग 

बता दें कि मामला बेगूसराय का है जहां निगरानी अन्वेषण ब्यूरो (पटना) की टीम ने बड़ा बाबू संजय कुमार और उसके निजी दलाल शिवानंद को ₹6 हजार रिश्वत लेते रंगे हाथ दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद पूरे दफ्तर में भगदड़ और हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि एक पीड़ित व्यक्ति अपनी गाड़ी का स्वामित्व हस्तांतरण कराने के लिए महीनों से डीटीओ कार्यालय के चक्कर लगा रहा था लेकिन सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के बजाय बड़ा बाबू और उसका दलाल उससे लगातार रिश्वत की मांग कर रहे थे। आरोप है कि बिना पैसे दिए फाइल आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया गया था।बड़ा बाबू और उसका दलाल खुलेआम ६००० की डिमांड कर रहे थे । रिश्वत की रकम ₹6 हजार तय हुई, तब परेशान होकर पीड़ित ने निगरानी विभाग से शिकायत कर दी।

रिश्वत लेते ही दबोचे गए दोनों आरोपी

निगरानी विभाग ने शिकायत का सत्यापन कराया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई। इसके बाद डीएसपी के नेतृत्व में विशेष ट्रैप टीम का गठन किया गया। शुक्रवार को तय योजना के तहत पीड़ित व्यक्ति रिश्वत की केमिकल लगी रकम लेकर डीटीओ कार्यालय पहुंचा। जैसे ही पीड़ित ने ₹6 हजार की राशि बड़ा बाबू संजय कुमार और दलाल शिवानंद को सौंपी, पहले से घात लगाए बैठी निगरानी टीम ने दोनों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के दौरान जब दोनों आरोपियों के हाथ धुलवाए गए तो उनका रंग गुलाबी हो गया, जिससे रिश्वत लेने की पुष्टि हुई।