बिहार में सड़क हादसों पर बड़ा अभियान: अब जागरूकता होगी मुख्य हथियार

बिहार में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने इस बार सिर्फ चालान या सख्ती नहीं, बल्कि जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। जनवरी महीने से पूरे राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर ऐसा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जो ड्राइवरों के व्यवहार से लेकर आम नागरिकों की जिम्मेदारी तक को नए सिरे से परिभाषित करता है। इस अभियान का मकसद है................

बिहार में सड़क हादसों पर बड़ा अभियान: अब जागरूकता होगी मुख्य हथियार

बिहार में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए परिवहन विभाग ने इस बार सिर्फ चालान या सख्ती नहीं, बल्कि जागरूकता को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। जनवरी महीने से पूरे राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर ऐसा व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जो ड्राइवरों के व्यवहार से लेकर आम नागरिकों की जिम्मेदारी तक को नए सिरे से परिभाषित करता है। इस अभियान का मकसद है, हादसों को होने से पहले ही रोकना।

जागरूकता और प्रशिक्षण को सबसे बड़ा हथियार
बिहार में सड़क हादसों की लगातार बढ़ती संख्या को रोकने के लिए राज्य परिवहन विभाग ने इस बार सिर्फ चालान और सख्ती पर भरोसा नहीं किया है। इसके बजाय उन्होंने जागरूकता और प्रशिक्षण को सबसे बड़ा हथियार बनाया है। जनवरी 2026 से पूरे राज्य में सड़क सुरक्षा को लेकर व्यापक अभियान चलाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य है-हादसों को होने से पहले ही रोकना।

चालकों और नागरिकों के लिए रिफ्रेशर ट्रेनिंग
परिवहन विभाग ने चालकों के लिए विशेष रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रोग्राम शुरू किए हैं। इसमें शामिल हैं सड़क यातायात संकेतों की जानकारी,लेन ड्राइविंग और ओवरस्पीडिंग के खतरे,हेल्मेट और सीटबेल्ट की अनिवार्यता।साथ ही, जिलों में जागरूकता रथ सड़कों पर उतर चुके हैं, जो गांव और शहर में लोगों को सुरक्षित ड्राइविंग का संदेश दे रहे हैं। कमजोर दृष्टि वाले चालकों के लिए नि:शुल्क आंखों की जांच भी कराई जा रही है, ताकि दुर्घटनाओं को रोका जा सके।

युवा पीढ़ी को सड़क सुरक्षा का ब्रांड एंबेसडर 
युवा पीढ़ी को सड़क सुरक्षा का ब्रांड एंबेसडर बनाया जा रहा है। वहीं अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है छात्रों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करना। जिला परिवहन पदाधिकारी, पटना और मिशन रोड सेफ्टी के सहयोग से स्कूल और कॉलेजों में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहे हैं।9वीं से 12वीं कक्षा के छात्रों को सड़क पर जिम्मेदार नागरिक बनने की शिक्षा दी जा रही है।नवंबर 2025 से अब तक 25 संस्थानों के 10,000 से अधिक छात्रों को प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया जा चुका है, जबकि लगभग 50,000 छात्रों तक अप्रत्यक्ष रूप से संदेश पहुंचा है। लक्ष्य है कि 31 मार्च 2026 तक 100 संस्थानों को इस अभियान से जोड़ा जाए।

शिक्षक, स्टाफ और वाहन चालक भी जुड़े
बता दें कि सिर्फ छात्र ही नहीं, बल्कि शिक्षक, स्कूल स्टाफ और वाहन चालक भी सुरक्षित ड्राइविंग की ट्रेनिंग ले रहे हैं। विभाग का मानना है कि जब बच्चे सड़क सुरक्षा को समझेंगे, तो वे अपने घर और समाज में भी इसका संदेश फैलाएंगे।सोशल मीडिया, अखबार और जनसंपर्क माध्यमों के जरिए लोगों से लगातार अपील की जा रही है-आईएसआई मार्क वाला हेल्मेट पहनें।चार पहिया वाहन में सीटबेल्ट लगाएं।निर्धारित गति सीमा का पालन करें।अब यह सिर्फ नियम नहीं, बल्कि जान बचाने का साधन बताया जा रहा है।