NEET छात्रा मौत केस पहुंचा मानवाधिकार आयोग-आत्महत्या नहीं, साज़िश का आरोप

पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से कथित रेप और हत्या के मामले ने बिहार की राजनीति और समाज को झकझोर दिया है। NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की रहस्यमयी मौत अब सिर्फ एक सामान्य अपराध का मामला नहीं रह गई है। यह घटना न्याय, मानवाधिकार और सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है। मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और ......

NEET छात्रा मौत केस पहुंचा मानवाधिकार आयोग-आत्महत्या नहीं, साज़िश का आरोप

पटना में NEET की तैयारी कर रही छात्रा से कथित रेप और हत्या के मामले ने बिहार की राजनीति और समाज को झकझोर दिया है। NEET की तैयारी कर रही एक छात्रा की रहस्यमयी मौत अब सिर्फ एक सामान्य अपराध का मामला नहीं रह गई है। यह घटना न्याय, मानवाधिकार और सिस्टम की जवाबदेही की परीक्षा बन चुकी है। मामला अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) और बिहार राज्य मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुका है।मुजफ्फरपुर के मानवाधिकार अधिवक्ता सुबोध कुमार झा ने इस मामले में दो अलग-अलग याचिकाएं दायर कर उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने पटना हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को भी पत्र लिखकर मामले में तुरंत कार्रवाई की गुहार लगाई है।

साजिश के संकेत?
अधिवक्ता  का कहना है कि छात्रा के शरीर पर पाए गए चोटों के निशान, परिस्थितिजन्य साक्ष्य और बाद की मेडिकल रिपोर्ट यह दर्शाते हैं कि इस घटना को जानबूझकर आत्महत्या का रूप देने की कोशिश की गई। झा ने साफ शब्दों में कहा है कि किसी आरोपी को बचाने के लिए यदि जघन्य अपराध को दबाने का प्रयास किया गया है, तो यह स्वयं एक दंडनीय अपराध है।”उन्होंने सवाल उठाया कि जब पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आई, तो जांच की दिशा अचानक क्यों बदल गई? क्या इससे पहले जानबूझकर गलत कहानी गढ़ी जा रही थी?

जांच पर सवाल
अधिवक्ता का आरोप है कि इस मामले में पुलिस, डॉक्टर, वरिष्ठ अधिकारी और हॉस्टल संचालक द्वारा दिए गए बयान वास्तविक तथ्यों से मेल नहीं खाते। यही वजह है कि अब मानवाधिकार आयोग से मांग की गई है कि मामले की जांच किसी अवकाश-प्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में उच्चस्तरीय और निष्पक्ष रूप से कराई जाए। बता दें कि छात्रा जहानाबाद जिले की रहने वाली थी।वह पटना के मुन्नाचक, कंकड़बाग स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही थी।

मौत को आत्महत्या बताने की कोशिश
बता दें कि शुरुआती जांच में पुलिस ने मौत को आत्महत्या बताने की कोशिश की, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने यह नैरेटिव पूरी तरह झुठला दिया।यह मामला अब सिर्फ एक अपराध का नहीं, बल्कि सिस्टम और मानवाधिकारों की परीक्षा बन चुका है। सवाल यही है: यह महज़ लापरवाही थी या किसी ताक़तवर को बचाने की गहरी साजिश? जवाब की तलाश अब मानवाधिकार आयोग तक पहुंच चुकी है, और पूरे देश की निगाहें इस मामले पर टिकी हुई हैं।