गरीबों के मसीहा अशोक ठाकुर की रहस्यमय मौत, पूर्णिया सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर

सात बेटियों के पिता और गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले पूर्णिया के चर्चित  आदिवासी नेता अशोक ठाकुर की रहस्यमय मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आदिवासियों की आवाज़ बनकर वर्षों से संघर्ष करने वाले अशोक ठाकुर की आवाज़ आज खामोश कर दी गई है।परिजनों और स्थानीय लोगों को पूरा संदेह है कि भूमाफिया या उनसे जुड़े लोगों ने सुनियोजित तरीके से उनकी हत्या की है। इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन से जुड़े वे विवाद बताए.....

गरीबों के मसीहा अशोक ठाकुर की रहस्यमय मौत, पूर्णिया सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर

सात बेटियों के पिता और गरीबों के मसीहा कहे जाने वाले पूर्णिया के चर्चित  आदिवासी नेता अशोक ठाकुर की रहस्यमय मौत ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। आदिवासियों की आवाज़ बनकर वर्षों से संघर्ष करने वाले अशोक ठाकुर की आवाज़ आज खामोश कर दी गई है।परिजनों और स्थानीय लोगों को पूरा संदेह है कि भूमाफिया या उनसे जुड़े लोगों ने सुनियोजित तरीके से उनकी हत्या की है। इसकी सबसे बड़ी वजह जमीन से जुड़े वे विवाद बताए जा रहे हैं, जिनमें अशोक ठाकुर लगातार पंचायत के माध्यम से गरीबों और आदिवासियों के हक़ में फैसले कराते रहे थे।

जमीन विवाद बना हत्या की वजह?
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अशोक ठाकुर कल भी एक पंचायती मामले में सक्रिय थे। वे जमीन से जुड़े मामलों में निष्पक्ष होकर पंचायती करते थे, जिससे भूमाफियाओं को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। यही कारण माना जा रहा है कि उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रची गई।इस दुखद घड़ी में पूरा समाज अशोक ठाकुर के परिवार के साथ खड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।

आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़
जमीन माफिया के खिलाफ चट्टान की तरह लड़ने वाले गरीबों आदिवासियों के मसीहा अशोक ठाकुर की मौत की खबर सुनते ही  पूर्णिया सहित आसपास के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। समर्थक, शुभचिंतक और परिचित गहरे सदमे में हैं। अशोक ठाकुर अपने सामाजिक कार्यों, सरल स्वभाव और जनसेवा के लिए जाने जाते थे। उनका जाना पूर्णिया के लिए अपूरणीय क्षति मानी जा रही है

डरने की नहीं, सच सामने लाने की अपील
वहीं सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच की मांग की है। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि “बिना डरे, बिना भय के सच सामने आएं। इंसाफ जरूर मिलेगा।”अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस मामले में निष्पक्ष और तेज़ कार्रवाई करेगा, या फिर एक और आदिवासी आवाज़ इंसाफ की राह देखते-देखते खामोश हो जाएगी।