मुख्यमंत्री ने 150 सरकारी स्कूलों में किया स्मार्ट क्लास का शुभारंभ, 10 मॉडल विद्यालयों में JEE-NEET की निःशुल्क कोचिंग

सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत बदलने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी ने आज को पटना के 150 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरूआत की। राजधानी के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर में मुख्यमंत्री ने इसका शुभारंभ किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के बच्चों को भी निजी विद्यालयों की तरह आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को लाइव ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी।

मुख्यमंत्री ने 150 सरकारी स्कूलों में किया स्मार्ट क्लास का शुभारंभ, 10 मॉडल विद्यालयों में JEE-NEET की निःशुल्क कोचिंग

DESWA DESK : सरकारी स्कूलों की सूरत और सीरत बदलने के लिए प्रतिबद्ध मुख्यमंत्री सम्राट चैधरी ने आज को पटना के 150 सरकारी स्कूलों में स्मार्ट क्लास की शुरूआत की। राजधानी के राजकीय कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय, शास्त्रीनगर में मुख्यमंत्री ने इसका शुभारंभ किया। इस योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी विद्यालयों के बच्चों को भी निजी विद्यालयों की तरह आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना है। इसके माध्यम से सरकारी स्कूलों के बच्चों को लाइव ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा मिलेगी।

 साथ ही, डिजिटल कटेंट और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की भी सुविधा मिलेगी। अब सरकारी स्कूलों के बच्चों को डिजिटल स्टडी मैटेरियल, नोट्स, रिकाॅर्डेड लेक्चर और नियमित माॅक टेस्ट की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। इससे बच्चे अब गुणवत्तापूर्ण शिक्षा हासिल कर सकेंगे। इस योजना का शुभारंभ करने के बाद कक्षा 9-12 के विद्यार्थियों को लाइव क्लास, AI आधारित अध्ययन सहायता, स्मार्ट डिजिटल कंटेंट, नोट्स, मॉक टेस्ट और JEE, NEET, CUET की तैयारी की सुविधा मिलेगी। 

जुलाई के अंत तक यह सुविधा पटना के सभी 422 उच्च विद्यालयों तक पहुंच जाएगी। साथ ही, पटना के 10 मॉडल विद्यालयों में JEE-NEET की निःशुल्क कोचिंग शुरू होगी, जिसका विस्तार 146 मॉडल विद्यालयों तक किया जाएगा। साथ ही शास्त्रीनगर स्थित बालिका हॉकी प्रशिक्षण केंद्र को आधुनिक खेल सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी तथा एस्ट्रो  टर्फ निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल की जाएगी।

इस योजना के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री वीआईपी प्रोटोकॉल को दरकिनार कर सीधे बच्चों के बीच क्लासरूम में जाकर बैठ गए। मुख्यमंत्री को अपने बीच पाकर जहां छात्र-छात्राएं उत्साहित दिखे, वहीं प्रशासनिक अमले में भी हड़कंप मचा रहा। मुख्यमंत्री सीधे स्कूल की एक कक्षा में दाखिल हुए और सीधे छात्रों के साथ बैठ गए। उस वक्त क्लास में जीव विज्ञान की पढ़ाई चल रही थी। मुख्यमंत्री ने एक सजग छात्र की तरह शिक्षक की बातों को सुना और 'कोशिका' के कामकाज को समझा।

क्लास खत्म होने के बाद जब छात्रों ने विषय से जुड़े सवाल पूछने शुरू किए, तो शिक्षकों ने भी बड़ी आत्मीयता से उनके जवाब दिए। इसके बाद मुख्यमंत्री स्कूल के अलग-अलग क्लासरूम में पहुंचे। उन्होंने करीब 30 मिनट का वक्त बच्चों के साथ बिताया और इस दौरान वे 7 से 8 क्लासरूम में गए।
विभिन्न कक्षाओं में छात्रों ने मुख्यमंत्री को अपने द्वारा तैयार किए गए प्रजेंटेशन दिखाए और उनके प्रोजेक्ट्स की जानकारी दी। सिर्फ बच्चों ने ही नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री ने भी एक परीक्षक की भूमिका निभाते हुए छात्रों से उनके प्रोजेक्ट्स और पढ़ाई को लेकर कई तीखे और ज्ञानवर्धक सवाल किए, जिसका बच्चों ने बेबाकी से जवाब दिया।

इस पूरे दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के साथ शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी भी मौजूद रहे, लेकिन उनका अंदाज चर्चा का विषय बना रहा। जहां मुख्यमंत्री बच्चों के बीच घुल-मिलकर उनके प्रजेंटेशन देख रहे थे और सवाल-जवाब कर रहे थे, वहीं शिक्षा मंत्री की दिलचस्पी इसमें बेहद कम नजर आई। मुख्यमंत्री के पूरे 30 मिनट के दौरे के दौरान साथ रहे शिक्षा मंत्री ने न तो किसी छात्र से कोई संवाद किया, न ही किसी का प्रजेंटेशन देखा। इसके उलट, वे क्लासरूम के कोने में खड़े होकर बार-बार अपनी कलाई घड़ी में वक्त निहारते नजर आए।