मुख्यमंत्री का बड़ा बयान; कहा- ओबीसी होंं या सवर्ण, आठ लाख से ऊपर कमाने वालों को नहीं मिलेगा आरक्षण का लाभ
अपने बयान को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों से जोड़ते हुए सम्राट चौधरी ने क्रीमी लेयर और ईडब्ल्यूएस (EWS) की सीमाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में जो आठ लाख रुपये से अधिक सालाना कमाता है, उसे (क्रीमी लेयर के तहत) आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। ठीक इसी तरह, सवर्ण जाति में भी जो आठ लाख रुपये से अधिक कमाएगा, उसे (EWS के तहत) आरक्षण नहीं मिलेगा।
DESWA DESK : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने देश और राज्य में आरक्षण की मौजूदा स्थिति को लेकर एक बड़ा और नीतिगत बयान दिया है। पीएम नरेंद्र मोदी के 12 वर्ष के कार्यकाल को लेकर आयोजित मीडिया संवाद में सीएम सम्राट चौधरी ने सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। इस दौरान आरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि आज के समय में देश का कोई भी सामाजिक वर्ग आरक्षण के दायरे से बाहर नहीं है। सम्राट चौधरी ने जोर देकर कहा कि आरक्षण का लाभ समाज के हर जरूरतमंद वर्ग तक पहुंच रहा है, और अब केवल वही लोग इससे बाहर हैं जो आर्थिक रूप से संपन्न हैं।
मुख्यमंत्री ने सामाजिक और आर्थिक वर्गीकरण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि अब इस देश में कोई आरक्षण के बिना नहीं है। जो अमीर है, वही बचा है। चाहे वह ओबीसी हो, उच्च जाति (सवर्ण) के लोग हों, हिंदू हों या मुसलमान, कोई भी वर्ग बिना आरक्षण के नहीं बचा है। अपने बयान को कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों से जोड़ते हुए सम्राट चौधरी ने क्रीमी लेयर और ईडब्ल्यूएस (EWS) की सीमाओं को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) में जो आठ लाख रुपये से अधिक सालाना कमाता है, उसे (क्रीमी लेयर के तहत) आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। ठीक इसी तरह, सवर्ण जाति में भी जो आठ लाख रुपये से अधिक कमाएगा, उसे (EWS के तहत) आरक्षण नहीं मिलेगा।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, सम्राट चौधरी का यह बयान बेहद महत्वपूर्ण है। इसके जरिए उन्होंने दो बड़े राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की है। सवर्णों के लिए दस फीसदी ईडब्ल्यूएस आरक्षण और ओबीसी के आरक्षण की आर्थिक सीमा (आठ लाख) को एक धरातल पर रखकर उन्होंने यह संदेश दिया है कि सरकार दोनों वर्गों के गरीबों के साथ खड़ी है। वहीं, हिंदू हो या मुसलमान' का जिक्र कर उन्होंने यह साफ किया कि आरक्षण का आधार जातिगत और आर्थिक पिछड़ापन है, न कि धार्मिक तुष्टिकरण। मुसलमान समाज के पिछड़े वर्ग भी ओबीसी या ईडब्ल्यूएस के तहत आरक्षण का लाभ ले रहे हैं।













