संस्कृत पर कांग्रेस सांसद के बयान से सियासी भूचाल, भाजपा-जदयू हमलावर, क्या बोल गए मो. जावेद ..?

किशनगंज के कांग्रेस सांसद मो. जावेद के एक विवादित बयान ने बिहार सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। सांसद ने संस्कृत को अंग्रेजी की तरह बाहर से आई भाषा बता दिया है, जिसके बाद सत्ताधारी एनडीए ने कांग्रेस को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। जहां बीजेपी और जदयू ने इस बयान को नफरती और विभाजनकारी बताया है, वहीं कांग्रेस की सहयोगी राजद ने इसे सांसद की निजी राय बताकर पूरे विवाद से दूरी बना ली है।

संस्कृत पर कांग्रेस सांसद के बयान से सियासी भूचाल, भाजपा-जदयू हमलावर, क्या बोल गए मो. जावेद ..?

DESWA DESK : किशनगंज के कांग्रेस सांसद मो. जावेद के एक विवादित बयान ने बिहार सहित पूरे देश के राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी बढ़ा दी है। सांसद ने संस्कृत को अंग्रेजी की तरह बाहर से आई भाषा बता दिया है, जिसके बाद सत्ताधारी एनडीए ने कांग्रेस को चौतरफा घेरना शुरू कर दिया है। जहां बीजेपी और जदयू ने इस बयान को नफरती और विभाजनकारी बताया है, वहीं कांग्रेस की सहयोगी राजद ने इसे सांसद की निजी राय बताकर पूरे विवाद से दूरी बना ली है।

दरअसल, हाल ही में शुरू हुए नए डिग्री कॉलेजों में उर्दू की पढ़ाई शुरू न किए जाने पर नाराजगी जताते हुए कांग्रेस सांसद मो. जावेद ने राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि हिंदी और उर्दू हिंदुस्तान की अपनी भाषाएं हैं, और दोनों के बीच बेहद गहरा रिश्ता है, लेकिन अंग्रेजी की तरह संस्कृत भी बाहर से आई भाषा है। सांसद ने आरोप लगाया कि डिग्री कॉलेजों में उर्दू की पढ़ाई न कराना उर्दू भाषी छात्र-छात्राओं के साथ अन्याय है और सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

 सांसद के इस बयान के बाद हिंदू और मुस्लिम धर्मगुरुओं ने इसे गैरजिम्मेदाराना और समाज में नफरत फैलाने वाला बयान करार दिया है। वहीं राजनीतिक दलों ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बीजेपी विधायक और पूर्व मंत्री नीरज बबलू ने कहा कि कांग्रेस सांसद मानसिक संतुलन खो चुके हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है, और यह देश की सबसे पुरानी और वैज्ञानिक भाषा है। उन्होंने कहा कि बिहार के साथ देश से भी कांग्रेस का जनाधार खत्म हो रहा है। ऐसे में सांसद का मानसिक संतुलन गड़बड़ा गया है।

 वहीं, जदयू के मुख्य प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि कांग्रेस शुरू से तुष्टिकरण की राजनीति करती आई है। कांग्रेस सांसद का ताजा बयान देश को बांटने की साजिश है। उन्होंने कहा कि हिंदी, संस्कृत और उर्दू आपस में जुड़े हुए हैं। हिंदुस्तान की तहजीब सभी भाषाओं का सम्मान करना सिखाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सांसद जानबूझकर भाषाई विवाद खड़ा कर समाज में बंटवारा करना चाहते हैं।

वहीं, मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस की सहयोगी पार्टी आरजेडी ने इसे मो. जावेद का व्यक्तिगत बयान बताते हुए पल्ला झाड़ लिया है।  राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जैसे-जैसे चुनावी दौर नजदीक आता है, नेताओं की जुबान से ऐसे ध्रुवीकरण करने वाले बयान निकलना आम हो जाता है। कांग्रेस सांसद का यह बयान न केवल भाषाई मर्यादा को लांघता है, बल्कि बहुसंख्यक आबादी की सांस्कृतिक पहचान पर भी चोट करता है। फिलहाल, इस बयान ने विपक्ष को बैकफुट पर धकेल दिया है और एनडीए बांकीपुर उपचुनाव में भी इसे एक बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है।