खान सर का बचना अब मुश्किल, कदमकुआं थाने में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत केस, गिरफ्तारी को कई जगहों पर छापे

शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दो जून की रात उनकी कोचिंग पर हुए हमले के मामले में पटना पुलिस अब सक्रिय हो गई है। कदमकुआं थाने में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसके बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

खान सर का बचना अब मुश्किल, कदमकुआं थाने में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट के तहत केस, गिरफ्तारी को कई जगहों पर छापे

DESWA DESK : राजधानी पटना का कोचिंग हब एक बार फिर विवादों के केंद्र में है, लेकिन इस बार मामला किसी छात्र आंदोलन का नहीं, बल्कि गोलियों की गूंज और कानूनी शिकंजे का है। शिक्षक फैसल खान उर्फ खान सर की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। दो जून की रात उनकी कोचिंग पर हुए हमले के मामले में पटना पुलिस अब सक्रिय हो गई है। कदमकुआं थाने में उनके खिलाफ हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसी संगीन धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है, जिसके बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

वीडियो साक्ष्य बना पुलिस की कार्रवाई का आधार
दरअसल, हमले के दौरान खान सर के निजी सुरक्षाकर्मियों (बॉडीगार्ड्स) द्वारा की गई ताबड़तोड़ फायरिंग का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। पुलिस ने इसी वीडियो को संज्ञान में लेते हुए पहले ही दोनों बॉडीगार्ड्स को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। खान सर से भी इस संबंध में लंबी पूछताछ की गई थी, लेकिन अब पुलिस के अपने बयान पर दर्ज एफआईआर में सीधे तौर पर खान सर को नामजद आरोपी बनाया गया है।

आत्मरक्षा का तर्क: उड़कर नहीं आ सकती थी पुलिस
इस पूरे घटनाक्रम पर खान सर ने अपना पक्ष रखते हुए पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने साफ किया कि जो भी फायरिंग हुई, वह विशुद्ध रूप से 'सेल्फ डिफेंस' (आत्मरक्षा) में की गई थी। खान सर ने कहा,कोचिंग पर हमला हो रहा था, मारपीट की जा रही थी। मुझे बखूबी पता था कि पुलिस को घटना स्थल पर पहुंचने में समय लगेगा, पुलिस वहां उड़कर तो नहीं आ सकती थी। ऐसे में आत्मरक्षा के अलावा कोई विकल्प नहीं था। उन्होंने आगे तर्क दिया कि निजी सुरक्षाकर्मी इसीलिए रखे जाते हैं ताकि संकट के समय जान-माल की रक्षा की जा सके। जब तक पुलिस नहीं आई, तब तक गार्ड्स ने स्थिति को संभाला और किसी को निशाना बनाकर गोली नहीं चलाई गई।

पहले पुलिस की पीठ थपथपाई, अब बताया लेटलतीफ
इस हाई-प्रोफाइल मामले में खान सर के बयानों में आया बदलाव भी चर्चा का विषय बना हुआ है। हमले के ठीक बाद जहां उन्होंने त्वरित कार्रवाई के लिए पटना पुलिस की जमकर तारीफ की थी, वहीं अब कानूनी शिकंजा कसते ही उन्होंने पुलिस की लेटलतीफी पर सवाल दाग दिए हैं। यह मामला अब एक गंभीर कानूनी बहस की ओर मुड़ गया है। भारतीय कानून में अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए 'राइट टू डिफेंस' (आत्मरक्षा का अधिकार) का प्रावधान तो है, लेकिन इसकी भी एक सीमा तय है। क्या खान सर के गार्ड्स द्वारा चलाई गई गोलियां सिर्फ डराने के लिए थीं या कानून को हाथ में लेने का प्रयास? क्या पुलिस की यह कार्रवाई कानून व्यवस्था की बहाली के लिए है या किसी दबाव का नतीजा? इन सवालों के जवाब अब जांच में ही तय होंगे, लेकिन फिलहाल पटना के इस चर्चित शिक्षक के लिए आने वाले दिन बेहद चुनौतीपूर्ण नजर आ रहे हैं।