मधुबनी में दखल-दिहानी के दौरान भारी बवाल : शरीर में आग लगा धधकते हुए घर से बाहर भागा बुजुर्ग, उग्र भीड़ ने कमिश्नर को पीटा
उग्र भीड़ ने प्रशासनिक टीम पर धावा बोलकर उन्हें खदेड़ दिया और कोर्ट द्वारा प्रतिनियुक्त कमिश्नर को बंधक बनाकर बेरहमी से पीट डाला। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव व्याप्त हो गया है। हालात को संभालने के लिए बेनीपट्टी एसडीओ शारंग पाणि पाण्डेय और डीएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में जिले के करीब दस थानों की पुलिस फोर्स गांव में कैंप कर रही है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है।
DESWA DESK : मधुबनी जिले के बेनीपट्टी थाना क्षेत्र के अधवारी गांव (वार्ड-5) में कोर्ट के आदेश पर जमीन की दखल-दिहानी कराने पहुंची पुलिस और प्रशासनिक टीम के सामने रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना घटी। नापी के दौरान अचानक एक बुजुर्ग अपने शरीर पर लगी आग से धधकता हुआ चिल्लाते हुए घर से बाहर भागा और पास के खेत में जा गिरा। बुजुर्ग को जिंदा जलता देख वहां मौजूद ग्रामीणों की भीड़ हिंसक हो उठी।
उग्र भीड़ ने प्रशासनिक टीम पर धावा बोलकर उन्हें खदेड़ दिया और कोर्ट द्वारा प्रतिनियुक्त कमिश्नर को बंधक बनाकर बेरहमी से पीट डाला। घटना के बाद पूरे गांव में तनाव व्याप्त हो गया है। हालात को संभालने के लिए बेनीपट्टी एसडीओ शारंग पाणि पाण्डेय और डीएसपी अमित कुमार के नेतृत्व में जिले के करीब दस थानों की पुलिस फोर्स गांव में कैंप कर रही है। स्थिति फिलहाल नियंत्रण में लेकिन तनावपूर्ण बनी हुई है।
जानकारी के मुताबिक, अधवारी गांव के राजेंद्र ठाकुर और महेंद्र यादव के बीच घरारी की जमीन को लेकर वर्षों से मुकदमा चल रहा था। हाल ही में सिविल कोर्ट (मनीष रंजन के न्यायालय) से महेंद्र यादव के पक्ष में फैसला आया था। इसी ताजा आदेश के आलोक में बुधवार को अंचलाधिकारी (सीओ) अभिषेक आनंद और अपर थानाध्यक्ष संजय कुमार सिंह, कोर्ट द्वारा प्रतिनियुक्त कमिश्नर रत्नाकर झा के साथ महेंद्र यादव को जमीन का कब्जा दिलाने पहुंचे थे। पुलिस-प्रशासन की मौजूदगी में जैसे ही अमीन ने जमीन की नापी शुरू की, वैसे ही वहां चीख-पुकार मच गई।
अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे 60 वर्षीय बुजुर्ग राजेंद्र ठाकुर के परिजनों ने दूसरे पक्ष पर बेहद संगीन आरोप लगाए हैं। परिजनों का कहना है कि राजेंद्र ठाकुर को इस जमीन पर पहले दो बार कोर्ट से डिक्री मिल चुकी थी। इस बार महेंद्र यादव के पक्ष में आए आदेश के बाद हमें जमीन खाली करने का कोई नोटिस तक नहीं दिया गया। जब नापी चल रही थी, तभी महेंद्र यादव के दो बेटों ने घर में पीछे के रास्ते घुसकर राजेंद्र ठाकुर के शरीर पर केरोसिन छिड़क कर आग लगा दी।
जैसे ही राजेंद्र ठाकुर आग की लपटों से घिरे छटपटाते हुए खेत में गिरे, वहां तमाशबीन बनी सैकड़ों की भीड़ का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुंच गया। भीड़ ने पुलिस-प्रशासन हाय-हाय के नारे लगाते हुए अधिकारियों पर हमला बोल दिया। अचानक हुए इस पथराव और हमले से सहमी पुलिस और प्रशासनिक टीम को पीछे हटना पड़ा। इसी अफरा-तफरी में कोर्ट के कमिश्नर रत्नाकर झा भीड़ के हत्थे चढ़ गए, जिनकी उग्र लोगों ने जमकर धुनाई कर दी। अधिकारियों को जान बचाकर मौके से भागना पड़ा।
बुजुर्ग राजेंद्र ठाकुर आग में बुरी तरह झुलस चुके हैं। उन्हें आनन-फानन में पहले जिरौल के एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां से डॉक्टरों ने उन्हें अनुमंडल अस्पताल भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद बुजुर्ग की नाजुक स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उन्हें बेहतर इलाज के लिए जिला सदर अस्पताल रेफर कर दिया है। थानाध्यक्ष ने कहा कि कोर्ट के आदेश के आलोक में टीम दखल-दिहानी कराने गांव गई थी। इसी बीच यह अप्रत्याशित घटना घटी और भीड़ उग्र हो गई। बुजुर्ग कैसे झुलसे, इसकी गहन जांच की जा रही है। फिलहाल कानून-व्यवस्था बहाल करना पहली प्राथमिकता है। हमलावरों और शांति भंग करने वालों की पहचान कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।













