मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में भीषण आग : चार आईसीयू मरीजों की मौत, दस की आशंका; सरकार एक्शन में
मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और नामी निजी अस्पतालों में से एक 'प्रसाद हॉस्पिटल' में भीषण आग लगने से अब तक चार आईसीयू मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, मौके पर पहुंचे फायर ऑफिसर के बयान ने इस त्रासदी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, जिसमें लगभग दस लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है।
DESWA DESK : उत्तर बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और नामी निजी अस्पतालों में से एक 'प्रसाद हॉस्पिटल' में भीषण आग लगने से अब तक चार आईसीयू मरीजों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। हालांकि, मौके पर पहुंचे फायर ऑफिसर के बयान ने इस त्रासदी की गंभीरता को और बढ़ा दिया है, जिसमें लगभग दस लोगों की मौत होने की आशंका जताई जा रही है। इस अग्निकांड के बाद पूरे अस्पताल परिसर में चीख-पुकार और अफरा-तफरी का माहौल कायम हो गया।
सम्राट सरकार एक्शन मोड में, मुख्यमंत्री ने जताया गहरा शोक
अस्पताल में हुए इस भीषण हादसे पर सम्राट सरकार पूरी तरह से एक्शन मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। मुख्यमंत्री ने X पर ट्वीट किया 'मुजफ्फरपुर के एक निजी अस्पताल में आग लगने से चार व्यक्तियों की मृत्यु अत्यंत दुःखद है। शोक-संतप्त परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। ईश्वर दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें तथा परिजनों को इस कठिन समय में संबल दें। मृतकों के परिजनों को अविलंब 4-4 लाख रुपये का अनुग्रह अनुदान प्रदान करने का निर्देश दिया गया है। स्थानीय प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है तथा घायलों के उपचार हेतु सदर अस्पतालों में समुचित व्यवस्था की गई है।' मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को भी निर्देश दिया है कि मृतकों के परिजनों को तत्काल उचित मुआवजा मुहैया कराया जाए। इसके साथ ही उन्होंने हादसे में झुलसे और प्रभावित हुए सभी घायलों के समुचित एवं बेहतर इलाज की मुकम्मल व्यवस्था करने के कड़े निर्देश दिए हैं।
स्वास्थ्य मंत्री ने डीएम से ली जानकारी, उच्च स्तरीय जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने मुजफ्फरपुर के जिलाधिकारी सुब्रत सेन से फोन पर बात कर घटना की पल-पल की जानकारी ली। स्वास्थ्य मंत्री ने डीएम को स्पष्ट निर्देश दिया है कि पहली प्राथमिकता घायलों की जान बचाना और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देना है। इसके साथ ही उन्होंने इस बात की जांच के भी आदेश दिए हैं कि अस्पताल में सुरक्षा मानकों और फायर एनओसी का पालन किया जा रहा था या नहीं।
पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी से जुड़ा है अस्पताल का इतिहास
प्रसाद हॉस्पिटल का मुजफ्फरपुर ही नहीं, बल्कि बिहार के सियासी गलियारों में भी एक खास रसूख रहा है। इस अस्पताल का पूर्व मुख्यमंत्री और हम संरक्षक जीतनराम मांझी से बेहद खास रिश्ता रहा है। जब मांझी बिहार के मुख्यमंत्री थे, तब उन्होंने विशेष रुचि लेकर इस अस्पताल का उद्घाटन किया था। जुड़ाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तय उद्घाटन समारोह के दिन मांझी सरकारी दौरे पर मुजफ्फरपुर आए थे, लेकिन समय की कमी के कारण अस्पताल नहीं पहुंच सके थे। इसके बावजूद, इस अस्पताल के प्रति उनके खास लगाव के चलते महज चार दिन बाद उन्होंने दोबारा समय निकाला और विशेष रूप से मुजफ्फरपुर पहुंचकर प्रसाद हॉस्पिटल का भव्य उद्घाटन किया था।
प्रबंधन ने साधी चुप्पी, उठ रहे गंभीर सवाल
इतने बड़े हादसे और कई मासूम जिंदगियों के चले जाने के बाद भी प्रसाद हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से संवेदनहीनता देखने को मिल रही है। कांड को लेकर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या सफाई सामने नहीं आई है। इस चुप्पी ने कई गंभीर सवालों को जन्म दे दिया है। क्या अस्पताल का आईसीयू वार्ड सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर चलाया जा रहा था? आग लगने की स्थिति में मरीजों को सुरक्षित निकालने के लिए क्या कोई इमरजेंसी एग्जिट या रेस्क्यू प्लान था? क्या शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ? फिलहाल, जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, इस भीषण लापरवाही की परतें और खुलने की उम्मीद है।













