जनगणना कार्य में लगे अफसरों के तबादले पर केंद्र नाराज; गृह मंत्रालय ने बिहार के मुख्य सचिव को लिखा पत्र
बिहार में हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार द्वारा पिछले महीने किए गए अफसरों के तबादलों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को एक आधिकारिक पत्र भेजकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।
DESWA DESK : बिहार में हाल ही में हुए बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच तल्खी बढ़ती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली बिहार सरकार द्वारा पिछले महीने किए गए अफसरों के तबादलों पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। इस संबंध में गृह मंत्रालय ने बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत को एक आधिकारिक पत्र भेजकर अपनी चिंताओं से अवगत कराया है।
केंद्र सरकार की इस आपत्ति की मुख्य वजह साल 2027 में होने वाली आजनगणना है। पिछले महीने राज्य सरकार ने अलग-अलग अधिसूचनाएं जारी कर विभिन्न विभागों के साथ-साथ जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर पर बड़े पैमाने पर अधिकारियों का स्थानांतरण किया था। गृह मंत्रालय का कहना है कि इन तबादलों की जद में कई ऐसे अधिकारी भी आ गए हैं, जिन्हें 2027 की जनगणना के कार्य में बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी गई थी।
आमतौर पर जनगणना या किसी भी बड़े राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत से पहले उसमें शामिल नोडल अधिकारियों के तबादलों पर रोक रहती है, ताकि प्रक्रियाओं और लॉजिस्टिक्स को सुचारू रूप से लागू किया जा सके। प्रशासनिक व्यवस्था में जिलाधिकारी (डीएम), प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) और अंचलाधिकारी (सीओ) जमीनी स्तर पर जनगणना के नोडल अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं।
जिलाधिकारी पूरे जिले में जनगणना के मुख्य समन्वयक होते हैं। वहीं, बीडीओ और सीओ प्रखंड और अंचल स्तर पर डेटा संग्रह, कर्मियों की तैनाती और प्रशिक्षण की कमान संभालते हैं। मुख्य सचिव को भेजे पत्र में मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ऐन तैयारियों के वक्त इतने बड़े पैमाने पर इन नोडल अधिकारियों के ट्रांसफर से जनगणना के काम पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। नए अधिकारियों को क्षेत्र और कार्यप्रणाली को समझने में समय लगेगा, जिससे इस बेहद संवेदनशील और समयबद्ध राष्ट्रीय कार्यक्रम में देरी या बाधा आ सकती है।
गृह मंत्रालय के इस कड़े रुख के बाद अब बिहार के प्रशासनिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, राज्य सरकार अब बीच का रास्ता निकालने की कोशिश कर सकती है। मुख्यमंत्री सचिवालय और मुख्य सचिव के स्तर पर इस पत्र की समीक्षा की जा रही है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जनगणना कार्य से सीधे तौर पर जुड़े कुछ महत्वपूर्ण अधिकारियों के तबादले की अधिसूचना को या तो फिलहाल टाला जा सकता है या उन्हें अतिरिक्त प्रभार देकर काम जारी रखने को कहा जा सकता है।
अब देखना यह होगा कि सम्राट चौधरी की सरकार केंद्र की इस आपत्ति पर क्या जवाब देती है और प्रशासनिक मोर्चे पर क्या सुधारात्मक कदम उठाती है।













