बिहार में 'करोड़पति' पार्टियों की जंग : आरजेडी के बाद अब जेडीयू ने भी छुआ एक करोड़ सदस्यों का जादुई आंकड़ा

बिहार की सियासत में संगठन के मोर्चे पर एक बड़ा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी एक करोड़ सदस्यों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी दी है।

बिहार में 'करोड़पति' पार्टियों की जंग : आरजेडी के बाद अब जेडीयू ने भी छुआ एक करोड़ सदस्यों का जादुई आंकड़ा

DESWA DESK : बिहार की सियासत में संगठन के मोर्चे पर एक बड़ा दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल रहा है। लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के बाद अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) ने भी एक करोड़ सदस्यों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि की आधिकारिक जानकारी दी है।

संजय झा ने बुधवार की सुबह द्वीट के जरिए पार्टी के प्राथमिक सदस्यों की संख्या एक करोड़ होने का एलान किया। उन्होंने लिखा, एक करोड़ से अधिक सदस्यों वाले जदयू परिवार में आपका स्वागत है! हमें बताते हुए खुशी है कि जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार द्वारा 6 दिसंबर 2025 को शुरू किये गये जदयू सदस्यता अभियान 2025-28 के तहत एक करोड़ से अधिक प्राथमिक सदस्य बनाने के पहले लक्ष्य को छह महीने से भी कम समय में हासिल कर लिया गया है। कल 2 जून 2026 तक पार्टी के प्राथमिक सदस्यों की कुल संख्या एक करोड़ एक हजार नौ सौ पच्चीस हो चुकी है।

जेडीयू की इस बड़ी छलांग के बाद अब बिहार के दोनों प्रमुख क्षेत्रीय दल देश की सबसे बड़ी सदस्य संख्या वाली क्षेत्रीय पार्टियों की कतार में मजबूती से खड़े हो गए हैं। संजय झा ने कहा कि नीतीश कुमार की विकासवादी नीतियों और बेदाग छवि के कारण जनता का पार्टी पर भरोसा लगातार बढ़ा है। उन्होंने बताया कि हाल ही में चलाए गए विशेष सदस्यता अभियान के तहत पार्टी ने एक करोड़ से अधिक लोगों को जेडीयू परिवार से जोड़ा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जेडीयू का यह मजबूत कैडर बेस आगामी विधानसभा चुनावों में पार्टी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है।

सदस्यता के इस मुकाबले में जेडीयू की चिर-प्रतिद्वंद्वी आरजेडी ने यह मुकाम पहले ही हासिल कर लिया था। तेजस्वी यादव के नेतृत्व और माई समीकरण से आगे बढ़कर ए टू जेड की राजनीति करने का दावा करने वाली आरजेडी के पास पहले से ही एक करोड़ से अधिक पंजीकृत सदस्य हैं। अब जेडीयू की इस एंट्री के बाद बिहार की जमीन पर दोनों क्षेत्रीय दिग्गजों का संगठन ढांचा बराबरी पर आकर खड़ा हो गया है।

एक तरफ जहां बिहार में क्षेत्रीय दल एक-एक करोड़ के आंकड़े पर हैं, वहीं राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय जनता पार्टी बीजेपी दुनिया की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करती है, जिसके देशभर में करीब 18 करोड़ से अधिक सदस्य हैं। दूसरी तरफ, देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस भी इस रेस में पीछे नहीं है और देशभर में उसके करीब तीन करोड़ सक्रिय व प्राथमिक सदस्य हैं।

अब बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच सीधा मुकाबला होगा। जेडीयू और आरजेडी दोनों के पास अब जमीन पर उतारने के लिए कार्यकर्ताओं की फौज तैयार है। राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद संजय झा के नेतृत्व में जेडीयू का यह विस्तार नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति और गठबंधन के भीतर मोलतोल की शक्ति को और मजबूत करेगा। एक करोड़ सदस्यों का मतलब है कि बिहार के हर पांचवें या छठे वोटर तक सीधे पार्टी के कार्यकर्ता की पहुंच होना, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित करने का माद्दा रखता है।