बिहार बाढ़ पर NASA की तस्वीर ने दिखाया डर का मंजर , डूबे NDA के वोटर्स पर सांसदों को न  दर्द, न कोई परवाह।

Bihar Flood: NASA की तस्वीर में दिखी बिहार की भयावह बाढ़, NDA सांसदों से उठे सवाल

बिहार बाढ़ पर NASA की तस्वीर ने दिखाया डर का मंजर , डूबे NDA के वोटर्स पर सांसदों को न  दर्द, न कोई परवाह।

बिहार डूब रहा है , बिहार में बाढ़ की भयावह स्थिति अब सिर्फ जमीन पर मौजूद तस्वीरों में नहीं, बल्कि अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में भी साफ दिखाई दे रही है। NASA की ओर से जारी सैटेलाइट तस्वीर में गंडक नदी के पानी के बड़े इलाके में फैलाव को देखा जा सकता है। 

बाढ़ से बिहार के कई जिले प्रभावित हैं। इनमें सारण, पश्चिम चंपारण, गोपालगंज और पूर्वी चंपारण जैसे जिले प्रमुख रूप से प्रभावित इलाकों में शामिल हैं। कई जगहों पर गांवों का संपर्क टूट गया है, लोग सुरक्षित स्थानों की ओर जाने को मजबूर हैं और सांसद महोदय ग़ायब हैं।

लेकिन बाढ़ के बीच अब एक राजनीतिक सवाल भी तेजी से उठ रहा है जिन लोकसभा क्षेत्रों के लोग बाढ़ में फंसे हैं, वहां के सांसद कितने सक्रिय हैं?

जिन इलाकों में बाढ़, वहां NDA के सांसद

सारण लोकसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व भाजपा के राजीव प्रताप रूडी करते हैं। पश्चिम चंपारण से भाजपा के डॉ. संजय जायसवाल सांसद हैं। वाल्मीकिनगर से जदयू के सुनील कुमार लोकसभा पहुंचे हैं।वहीं गोपालगंज से जदयू के डॉ. आलोक कुमार सुमन और पूर्वी चंपारण से भाजपा के राधा मोहन सिंह सांसद हैं।

यानी बाढ़ से प्रभावित इन प्रमुख लोकसभा क्षेत्रों में मौजूदा सांसदों की राजनीतिक तस्वीर देखें तो यहां NDA का मजबूत प्रतिनिधित्व है।

सिर्फ सांसद ही नहीं बल्कि इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में NDA के विधायक भी हैं। ऐसे में सवाल तो हम पूछेंगे ही कि जब हजारों लोग बाढ़ में फंसे हैं , एक दूसरे से बिछड़ रहे हैं, तब उनके MP-MLA की प्राथमिकता क्या होनी चाहिए?

बाढ़ पीड़ितों के लिए आवाज कितनी बुलंद?

क्या बाढ़ प्रभावित लोगों की समस्या उतनी ही मजबूती से उठाई जा रही है, जितनी मजबूती से दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर बयान और सोशल मीडिया पोस्ट किए जा रहे हैं? यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि बाढ़ का संकट कुछ दिनों का राजनीतिक मुद्दा नहीं है। जिन परिवारों के घर, खेत और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है, वो इस संकट से हर साल दो दो हाथ करते है।

सोशल मीडिया पर सक्रियता 

आज MP-MLA की सक्रियता का एक बड़ा माध्यम सोशल मीडिया भी है। नेता लगातार X और दूसरे प्लेटफॉर्म पर राजनीतिक मुद्दों पर अपनी राय रखते हैं लेकिन बाढ़ के इस संकट के बीच सोशल मीडिया पर एक अलग ही तस्वीर दिखाई देती है। मसलन, सांसदों के सोशल मीडिया पोस्ट में दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर सक्रियता दिखाई देती है। 
वो सभी सांसद अपने सोशल मीडिया पर ज्ञानेश को बचाने का पूरा ज्ञान दे रहे हैं और तो और धर्म पर भी विशेष ध्यान है उनका मगर बाढ़ से कोई लेना देना नहीं दिखता |

ये वही वोटर हैं, जो चुनाव में सबसे जरूरी होते हैं

राजनीति का सबसे बड़ा सच चुनाव है और चुनाव का सबसे बड़ा आधार मतदाता होता है औरआज जो व्यक्ति बाढ़ में अपना घर छोड़कर राहत शिविर में पहुंचा है, जो किसान अपनी फसल बर्बाद होते देख रहा है, जिस परिवार का संपर्क सड़क से कट चुका है ये सब वही व्यक्ति है जो चुनाव के समय वोट डालने जाता है।लेकिन जिन लोगों ने इस आपदा में अपना घर, फसल, कारोबार या अपनों को खोया है, उनके मन में आपके लिए बसेक ही सवाल उठता है की हमसे इतनी नफ़रत क्यों ? 

Written by : WASIM RAZA