मंत्री दीपक प्रकाश की 'बगावत', सोशल मीडिया से हटाया मंत्री पद और PM मोदी की फोटो; जनता के बीच जाने का एलान

बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने एनडीए के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार न बनाए जाने से आहत दीपक प्रकाश ने न सिर्फ अपने सोशल मीडिया अकाउंट से 'मंत्री' का तमगा हटा लिया है, बल्कि एनडीए के सर्वमान्य नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को भी अपने प्रोफाइल से गायब कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने 'जनता की अदालत' में जाने का बड़ा एलान कर दिया है।

मंत्री दीपक प्रकाश की 'बगावत', सोशल मीडिया से हटाया मंत्री पद और PM मोदी की फोटो; जनता के बीच जाने का एलान

DESWA DESK : बिहार की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आ गया है। सम्राट सरकार में पंचायती राज मंत्री और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के बेटे दीपक प्रकाश ने एनडीए के खिलाफ सीधे तौर पर मोर्चा खोल दिया है। विधान परिषद चुनाव में उम्मीदवार न बनाए जाने से आहत दीपक प्रकाश ने न सिर्फ अपने सोशल मीडिया अकाउंट से 'मंत्री' का तमगा हटा लिया है, बल्कि एनडीए के सर्वमान्य नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को भी अपने प्रोफाइल से गायब कर दिया है। इसके साथ ही उन्होंने 'जनता की अदालत' में जाने का बड़ा एलान कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?
दरअसल, बिना किसी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य रहे दीपक प्रकाश को पंचायती राज जैसे महत्वपूर्ण विभाग का मंत्री बनाया गया था। नियम के मुताबिक, मंत्री पद पर बने रहने के लिए छह महीने के भीतर किसी भी सदन का सदस्य चुना जाना अनिवार्य था। दीपक प्रकाश और उनकी पार्टी को उम्मीद थी कि 18 जून को होनेवाली विधान परिषद चुनाव में उन्हें एनडीए की तरफ से उम्मीदवार बनाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। टिकट कटने के साथ ही अब उनका मंत्री पद जाना भी तय माना जा रहा है, जिसे दीपक प्रकाश के साथ 'बड़ा धोखा' माना जा रहा है।

सीटों के गणित में उलझा उपेंद्र कुशवाहा का कुनबा
बिहार में विधान परिषद की कुल 9 सीटों पर नियमित चुनाव और 1 सीट पर उपचुनाव होना है। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से इन 9 सीटों पर एनडीए की जीत पूरी तरह तय मानी जा रही है, जबकि एक सीट विपक्ष के खाते में जाना तय है। एनडीए ने इन 9 सुरक्षित सीटों का बंटवारा आपस में कर लिया है। भाजपा (BJP) 4 सीटें और जदयू (JDU) 4 सीट पर चुनाव लड़ेगी। लोजपा रामविलास (LJP-R) 1 सीट पर चुनाव लड़ेगी और चिराग पासवान ने अपनी पार्टी के कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष अशरफ अंसारी को उम्मीदवार बनाया है। 
इस पूरे समीकरण में उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी 'राष्ट्रीय लोक मोर्चा' को एक भी सीट नहीं दी गई। चिराग पासवान की पार्टी को जगह मिलने और खुद का पत्ता साफ होने से दीपक प्रकाश का छह महीने के भीतर सदन का सदस्य बनने का सपना पूरी तरह टूटता दिख रहा है।

आर-पार के मूड में दीपक प्रकाश, एनडीए में बढ़ी हलचल
सहयोगी दलों द्वारा दरकिनार किए जाने से नाराज दीपक प्रकाश अब आर-पार के मूड में नजर आ रहे हैं। सोशल मीडिया से मंत्री पद और पीएम मोदी की तस्वीर हटाना एनडीए के लिए एक सीधा और कड़ा संदेश माना जा रहा है। सियासी जानकारों का कहना है कि उपेंद्र कुशवाहा के कुनबे का यह कदम बिहार में एनडीए के भीतर सीट शेयरिंग और सहयोगियों के सम्मान को लेकर एक नए विवाद को जन्म दे सकता है।
दीपक प्रकाश द्वारा जनता के बीच जाने के एलान के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि उपेंद्र कुशवाहा इस पूरे घटनाक्रम पर क्या स्टैंड लेते हैं और क्या सम्राट सरकार इस बगावत को शांत करने के लिए कोई नया डैमेज कंट्रोल फॉर्मूला निकाल पाती है या नहीं।