बांकीपुर उपचुनाव में पीके की एंट्री से गरमाई सियासत, पप्पू यादव का तीखा हमला; हवा-हवाई नेता को मौका नहीं देगी जनता
राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के खुद चुनावी मैदान में उतरने के फैसले के बाद से ही बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस नेता और पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक 'हवा-हवाई' नेता करार दिया है।
DESWA DESK : राजधानी पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने जा रहे उपचुनाव ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मी को चरम पर पहुंचा दिया है। जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर के खुद चुनावी मैदान में उतरने के फैसले के बाद से ही बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। कांग्रेस नेता और पूर्णिया से निर्दलीय सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें एक 'हवा-हवाई' नेता करार दिया है।
पप्पू यादव ने दावा किया है कि बांकीपुर की प्रबुद्ध जनता जमीनी हकीकत को जानती है और वह ऐसे नेताओं को कभी मौका नहीं देगी। सांसद पप्पू यादव ने प्रशांत किशोर की कार्यशैली और उनकी रणनीति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि प्रशांत किशोर ने अपनी उम्मीदवारी की घोषणा करने से पहले या बाद में विपक्ष के किसी भी दल से संवाद करने की जहमत तक नहीं उठाई। वे बिना किसी गठबंधन या जमीनी तालमेल के सीधे जीत का सपना देख रहे हैं, जो बिहार की जमीनी सियासत में मुमकिन नहीं है।
पप्पू यादव ने मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य पर बात करते हुए भाजपा को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि सूबे की जनता मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की वर्तमान एनडीए सरकार के कामकाज से पूरी तरह नाखुश है और बदलाव का मन बना चुकी है। दरअसल, यह उपचुनाव कई मायनों में दिलचस्प हो गया है। जहां एक तरफ प्रशांत किशोर इसे राज्य सरकार के कामकाज पर 'जनमत संग्रह' मानकर खुद अपनी प्रतिष्ठा दांव पर लगा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ एनडीए के लि यह सीट बचाना और अपनी साख साबित करना बड़ी चुनौती है।
बांकीपुर विधानसभा सीट पिछले तीन दशकों से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है। यह सीट निवर्तमान विधायक और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस शहरी और प्रबुद्ध मतदाताओं वाली सीट पर प्रशांत किशोर का खुद उतरना एक बड़ा दांव है। पीके जहां जातिगत राजनीति से ऊपर उठकर 'बच्चों के भविष्य और विकास' के नाम पर वोट मांग रहे हैं, वहीं पप्पू यादव जैसे जमीनी नेताओं के तीखे हमले यह साफ करते हैं कि पीके की चुनावी राह आसान नहीं होने वाली है।













