औरंगाबाद में बालू वाले साहब का 1 करोड़ 80 लाख लेकर प्राइवेट ड्राइवर फरार; साहब हो गए लाचार, नहीं करा रहे हैं एफआईआर
स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के दावों के अनुसार, औरंगाबाद जिले के लगभग 25 प्रमुख बालू घाटों से हर महीने एक तय रकम की वसूली किए जाने की चर्चा है। प्रति घाट चर्चा में आई रकम के अनुसार लगभग नौ लाख रुपये प्रतिमाह वसूली की चर्चा है। अगर इस प्रकार 25 घाटों से वसूली जाने वाली कुल करम को जोड़ दें तो यह सवा दो करोड़ रुपये हर महीने होती है। सवाल यह है कि आखिर यह वसूली किसके इशारे पर हो रही है?
DESWA DESK : जिले में बालू घाटों की बंदोबस्ती को लेकर कथित मासिक वसूली की चर्चा सामने आ रही है। बिहार के औरंगाबाद जिले में नदियों के बालू घाटों पर जारी कथित मासिक वसूली के बड़े खेल को लेकर इलाके में तरह-तरह की चर्चा तेज हो गई है। बालू का अवैध खनन और परिवहन रोकने के तमाम प्रशासनिक दावों के बीच, सूत्रों के हवाले से जो आंकड़े और जानकारियां सामने आ रही हैं, वे चौंकाने वाली हैं।
स्थानीय चर्चाओं और सूत्रों के दावों के अनुसार, औरंगाबाद जिले के लगभग 25 प्रमुख बालू घाटों से हर महीने एक तय रकम की वसूली किए जाने की चर्चा है। प्रति घाट चर्चा में आई रकम के अनुसार लगभग नौ लाख रुपये प्रतिमाह वसूली की चर्चा है। अगर इस प्रकार 25 घाटों से वसूली जाने वाली कुल करम को जोड़ दें तो यह सवा दो करोड़ रुपये हर महीने होती है। सवाल यह है कि आखिर यह वसूली किसके इशारे पर हो रही है?
साथ ही, यदि इन दावों में थोड़ी भी सच्चाई है तो सवाल उठता है कि हर महीने वसूले जाने वाले इस करोड़ों रुपये के राजस्व का असली 'मालिक' या 'हिस्सेदार' आखिर कौन-कौन लोग हैं? इस पूरे कथित नेटवर्क में सबसे ज्यादा चर्चा सासाराम कनेक्शन की है। स्थानीय स्तर पर हो रही चर्चाओं के मुताबिक वसूली की इस राशि को एकत्र करने और नियंत्रित करने के लिए सासाराम से किसी 'जी' अक्षर के नाम वाले व्यक्ति के सक्रिय होने की बात कही जा रही है।
कहा जा रहा है कि यह व्यक्ति या सिंडिकेट किसी बड़े संरक्षण के तहत यह पूरा तंत्र संचालित कर रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि किसके इशारे पर और किस पावर सेंटर के नाम का इस्तेमाल कर यह कथित खेल चल रहा है?
बताया जा रहा है इस खेल में जिले के बड़े साहब को प्रतिमाह दो लाख, बालू खनन के बड़े साहब को ढाई लाख और छोटे साहब लोगों के लिए 1.20 लाख फिक्स किया गया है। घाट चलाने वाले और हमारे सूत्र ने यह भी बताया कि इसमें पटना वाले माननीय को भी प्रतिमाह एक लाख देने की बात तय हुई है। अगर स्थानीय लोगों की बातों पर भरोसा करें तो निश्चित रूप से शासन-प्रशासन के स्तर पर यह पता लगाया जाना जरूरी है कि आखिर ये सासाराम से आने वाले 'जी' नाम का व्यक्ति कौन है। क्या यह कोई बिचैलिया है या स्थानीय अधिकारी। जिस तरीके से सरेआम चर्चा है कि उपर से लेकर नीचे तक रकम पहुंचाई जा रही है और प्रति घाट के हिसाब से वसूली हो रही है तो इसके पीछे किसका शह है?
सूत्रों की मानें तो बताया यह भी जा रहा है कि इस अवैध वसूली में एक साहब के प्राइवेट ड्राइवर एक करोड़ 80 लाख लेकर फरार हो गए हैं, और वह ड्राइवर अबतक नहीं लौटा है। साहब की मजबूरी यह है कि वे एफआईआर भी दर्ज नहीं करा सकते हैं। 25 घाट से जिस तरीके से प्रति घाट नौ लाख की वसूली की चर्चा है तो प्रति माह सवा दो करोड़ की वसूली आखिर किसके संरक्षण में हो रही है और खनन विभाग के अधिकारी मौन क्यों साधे हुए हैं? अगर इतनी बड़ी रकम की कथित तौर पर प्रति माह वसूली हो रही है, तो बिहार जैसे गरीब राज्य को आखिर कौन 'लूटने' की साजिश रच रहा है? किसके इशारे पर और किसके नाम पर इतनी बड़ी रकम हर माह घाटों से वसूली जा रही है?
सबसे अहम सवाल यह है कि सासाराम से मासिक वसूली के लिए आने वाले यह 'जी' अक्षर से शुरू होने वाले नाम का व्यक्ति कौन है? अगर इसकी गहराई से जांच कराई जा जाए तो बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है, कई सफेदपोश चेहरे बेनकाब हो सकते हैं। विश्वस्त सूत्रों और स्थानीय लोगों की मानें तो यदि इस मामले में स्वतंत्र और निष्पक्ष एजेंसी आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) या उच्चस्तरीय एसआईटी से गहन जांच कराई जाए, तो लाल बालू के काले खेल का बड़ा सच उजागर हो सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस पूरे मामले की जांच से इस सिंडिकेट के काले साम्राज्य के पीछे छिपे कई रसूखदार चेहरों को बेनकाब कर सकती है।
यह खबर स्थानीय स्तर पर जारी चर्चाओं और सूत्रों के दावों एवं विभिन्न माध्यमों से प्राप्त आरोपों पर आधारित है। इन आरोपों की कोई स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन, अगर ऐसी चर्चा है तो शासन-प्रशासन को निश्चित रूप से इसकी जांच कराई जानी चाहिए। आखिर इस लाल बालू काले खेल में कौन-कौन से अधिकारी शामिल हैं। पटना में किस माननीय को रकम पहुंचाई जा रही है, इसकी भी जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी के कराई जानी चाहिए।













