रिशु श्री से एसवीयू की तीखी पूछताछ, बेऊर जेल से मुख्यालय लाकर उगलवा लिए कई बड़े राज ?

बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) का शिकंजा मुख्य आरोपित और भ्रष्ट ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रंजन सिन्हा पर पूरी तरह कस गया है। निगरानी कोर्ट से पांच दिनों की पुलिस रिमांड मिलने के बाद एसवीयू की टीम ने बेऊर जेल से रिशु श्री को अपनी कस्टडी में ले लिया। कस्टडी में लेते ही जांच टीम उसे सीधे अपने मुख्यालय लेकर पहुंची, जहां बंद कमरे में उससे तीखे सवालों की बौछार शुरू कर दी गई है।

रिशु श्री से एसवीयू की तीखी पूछताछ, बेऊर जेल से मुख्यालय लाकर उगलवा लिए कई बड़े राज ?

DESWA DESK : बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले में विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) का शिकंजा मुख्य आरोपित और भ्रष्ट ठेकेदार रिशु श्री उर्फ रंजन सिन्हा पर पूरी तरह कस गया है। निगरानी कोर्ट से पांच दिनों की पुलिस रिमांड मिलने के बाद एसवीयू की टीम ने बेऊर जेल से रिशु श्री को अपनी कस्टडी में ले लिया। कस्टडी में लेते ही जांच टीम उसे सीधे अपने मुख्यालय लेकर पहुंची, जहां बंद कमरे में उससे तीखे सवालों की बौछार शुरू कर दी गई है।

सूत्रों के मुताबिक, कस्टडी के पहले ही दिन एसवीयू के आला अफसरों ने रिशु श्री के सामने सवालों की लंबी फेहरिस्त रख दी। जांच एजेंसी मुख्य रूप से यह जानना चाहती है कि अरबों रुपये के इस टेंडर खेल के पीछे असली मास्टरमाइंड कौन है और रिशु श्री किस तरह सरकारी महकमों के बड़े अफसरों का फायदा उठा रहा था। साथ ही, एसवीयू यह जानना चाह रही है कि उसके सिंडिकेट में और कौन-कौन है? टेंडर हथियाने के इस खेल में रिशु श्री के साथ पर्दे के पीछे से और कौन से रसूखदार लोग या राजनेता शामिल थे?

एसवीयू यह भी पता लगा रही है कि उसने अफसरों को कैसे साधा? सरकारी टेंडरों की गोपनीयता भंग करने और मनमुताबिक शर्तें तय करवाने के लिए किन-किन बड़े अधिकारियों को रिश्वत या अन्य फायदे दिए गए? वहीं, काली कमाई को कहां खपाया गया? इस घोटाले से अर्जित की गई अकूत संपत्ति को कहां-कहां खपाया गया और किन शेल कंपनियों (फर्जी कंपनियों) में निवेश किया गया? 

जांच से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि शुरुआती पूछताछ में ही रिशु श्री ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। जांच एजेंसियों के हाथ अब तक ठेकेदार के अलावा कई बड़े अधिकारियों की गर्दन तक पहुंच चुके हैं। रिमांड के दौरान रिशु श्री जो भी राज उगलेगा, उसे दस्तावेजी सबूतों के साथ आमने-सामने बिठाकर तस्दीक किया जाएगा। माना जा रहा है कि इस पूछताछ के बाद बिहार के प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारे में बड़ा हड़कंप मच सकता है और कई रसूखदारों पर गिरफ्तारी की गाज गिर सकती है।

एसवीयू इस पांच दिनों की रिमांड अवधि का पूरा फायदा उठाना चाहती है, ताकि टेंडर घोटाले की पूरी क्रोनोलॉजी (कड़ी) को डिकोड किया जा सके। अब देखना दिलचस्प होगा कि रिशु श्री की जुबान खुलने के बाद इस महाघोटाले की आंच किन-किन बड़े 'साहबों' के बंगले तक पहुंचती है। फिलहाल, रिशु श्री के चेहरे पर कार्रवाई का खौफ साफ दिख रहा है।