अरवल में वाहन चेकिंग के दौरान दर्दनाक हादसा: अनियंत्रित हाइवा ने परिवहन सिपाही को कुचला, मौके पर मौत, एक गंभीर घायल

अरवल जिले में गुरुवार रात वाहन चेकिंग के दौरान हुए भीषण सड़क हादसे ने बिहार परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में परिवहन सिपाही (BMS) मुकेश कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सिपाही गौतम कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10:45 बजे, एमवीआई विपुल शेखर....

अरवल में वाहन चेकिंग के दौरान दर्दनाक हादसा: अनियंत्रित हाइवा ने परिवहन सिपाही को कुचला, मौके पर मौत, एक गंभीर घायल

अरवल जिले में गुरुवार रात वाहन चेकिंग के दौरान हुए भीषण सड़क हादसे ने बिहार परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे में परिवहन सिपाही (BMS) मुकेश कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य सिपाही गौतम कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए।प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार रात करीब 10:45 बजे, एमवीआई विपुल शेखर के नेतृत्व में परिवहन विभाग की टीम अरवल क्षेत्र में नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। इस दौरान एक ट्रक को रोककर उस पर जुर्माना किया जा रहा था। जुर्माने की प्रक्रिया के समय BMS मुकेश कुमार और गौतम कुमार ट्रक के पास खड़े थे।

इसी बीच विपरीत दिशा से तेज रफ्तार और अनियंत्रित हाइवा ट्रक ने जुर्माना किए जा रहे ट्रक में जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मुकेश कुमार दोनों वाहनों के बीच बुरी तरह फंस गए और उनकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं गौतम कुमार टक्कर के झटके से दूर जा गिरे और गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनका इलाज अस्पताल में जारी है।

4000 करोड़ का लक्ष्य, लेकिन कर्मचारियों के लिए न सुविधा, न सुरक्षा
बिहार परिवहन विभाग पर हर वर्ष 4000 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व वसूली का लक्ष्य तय किया जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि जिन कर्मचारियों से यह राजस्व वसूला जाता है, उन्हें न पर्याप्त वाहन दिए जाते हैं, न डीजल, न सुरक्षा उपकरण और न ही सुरक्षित चेकिंग व्यवस्था।इसके बावजूद कर्मचारियों पर राजस्व वसूली का जबरदस्त दबाव बनाया जाता है, जिससे वे अपनी जान जोखिम में डालकर हाईवे पर भारी वाहनों की जांच करने को मजबूर हैं।

एक साल में दूसरी ऑन-ड्यूटी मौत
यह कोई पहली घटना नहीं है। बीते एक साल में परिवहन विभाग के दो अधिकारियों की ऑन-ड्यूटी मौत हो चुकी है।कुछ महीने पहले दरभंगा में प्रवर्तन अवर निरीक्षक मुन्ना कुमार की मौत हुई थी और अब बक्सर निवासी परिवहन सिपाही (BMS) मुकेश कुमार की जान चली गई।

बड़े अधिकारी सुरक्षित, छोटे कर्मचारी बलि का बकरा
सबसे बड़ा सवाल यह है कि परिवहन विभाग के बड़े अधिकारियों को एक खरोंच तक नहीं आती, जबकि मैदान में काम करने वाले छोटे कर्मचारी अपनी जान गंवाने को मजबूर हैं।एसी कमरों में बैठकर राजस्व के लक्ष्य तय करने वाले अधिकारी पूरी तरह सुरक्षित रहते हैं, लेकिन बिना संसाधन और बिना सुरक्षा के BMS और प्रवर्तन कर्मियों को रात के अंधेरे में ट्रकों और हाइवा के सामने खड़ा कर दिया जाता है चेकिंग के नाम पर अवैध उगाही करने के लिए ।

अवैध उगाही और दबाव की असल तस्वीर
सूत्रों के अनुसार, राजस्व वसूली के नाम पर अवैध उगाही का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है। इसी दबाव में कर्मचारी अपनी सुरक्षा भूलकर कार्रवाई करने को मजबूर होते हैं। हादसे के बाद जांच और कागजी कार्रवाई जरूर होती है, लेकिन ना सिस्टम बदलता है, ना जिम्मेदारों पर कोई कार्रवाई होती है।