पिंक बस सेवा में नया अध्याय: बिहार की 6 महिलाएं बनेंगी बस चालक
बिहार की बेटियां अब केवल सफर नहीं करेंगी, बल्कि सफर को दिशा भी देंगी। राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक......
बिहार की बेटियां अब केवल सफर नहीं करेंगी, बल्कि सफर को दिशा भी देंगी। राज्य में महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल के तहत पिंक बस सेवा की कमान अब महिलाओं के हाथों में सौंपने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस क्रम में पिंक बस संचालन के लिए चयनित पहली 6 महादलित महिला चालकों का नियोजन आगामी 14 फरवरी को पटना स्थित अधिवेशन भवन में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार द्वारा किया जाएगा।
हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी/एलएमवी) ड्राइविंग लाइसेंस धारक
चयनित महिला चालकों में आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, अनीता कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी शामिल हैं। ये सभी हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी/एलएमवी) ड्राइविंग लाइसेंस धारक हैं। पिंक बस संचालन के लिए इन्हें औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीटीआर) में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद ये महिलाएं पटना की सड़कों पर पिंक बस चलाती नजर आएंगी।
राज्य की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ें
इस अवसर पर राज्य के परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सोच है कि राज्य की बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ें और आत्मनिर्भर बनें। महिला सशक्तिकरण को लेकर सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है और पिंक बस सेवा उसी दिशा में एक मजबूत पहल है। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि राज्य के सुपौल, बांका, मोतिहारी और नालंदा जिलों में नए आईडीटीआर केंद्र स्थापित करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। इन प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को पेशेवर ड्राइविंग प्रशिक्षण देकर उन्हें रोजगार से जोड़ा जाएगा।
सभी 100 पिंक बसों में महिला कंडक्टर तैनात
बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अनुसार, वर्तमान में आईडीटीआर में 13 अन्य महिला चालक भी एचएमवी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। फिलहाल निगम द्वारा संचालित सभी 100 पिंक बसों में महिला कंडक्टर तैनात हैं, जिससे महिलाओं को सुरक्षित और सम्मानजनक यात्रा का अनुभव मिल रहा है। अब महिला ड्राइवरों की तैनाती से यह सेवा पूरी तरह महिला-केंद्रित हो जाएगी।यह पहल न केवल महिलाओं की सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि उन्हें रोजगार, आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक पहचान भी दिलाएगी—जो बिहार के सामाजिक बदलाव की एक नई तस्वीर पेश करती है।













