परिवहन विभाग का बड़ा फैसला: अब ESI/MVI की तुरंत गिरफ्तारी नहीं, पहले होगी जांच

बिहार सरकार के परिवहन विभाग ने प्रवर्तन पदाधिकारियों (ESI/MVI) को लेकर बड़ा और स्पष्ट निर्णय लिया है। अब किसी वाहन चालक या बाहरी व्यक्ति की शिकायत पर प्रवर्तन पदाधिकारी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। विभाग ने साफ किया है कि हर शिकायत की पहले गहन जांच की जाएगी, साक्ष्यों की समीक्षा होगी और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे........

परिवहन विभाग का बड़ा फैसला: अब ESI/MVI की तुरंत गिरफ्तारी नहीं, पहले होगी जांच

बिहार सरकार के परिवहन विभाग ने प्रवर्तन पदाधिकारियों (ESI/MVI) को लेकर बड़ा और स्पष्ट निर्णय लिया है। अब किसी वाहन चालक या बाहरी व्यक्ति की शिकायत पर प्रवर्तन पदाधिकारी की तत्काल गिरफ्तारी नहीं होगी। विभाग ने साफ किया है कि हर शिकायत की पहले गहन जांच की जाएगी, साक्ष्यों की समीक्षा होगी और दोनों पक्षों के बयान दर्ज किए जाएंगे। इसके बाद विभागीय सहमति से ही आगे की कानूनी कार्रवाई संभव होगी।

वाहन जांच के अधिकारों में बढ़ोतरी
नए दिशा-निर्देशों के तहत प्रवर्तन पदाधिकारी अपने जिले की सीमा के भीतर किसी भी समय वाहन चेकिंग कर सकेंगे। इसके लिए अब किसी तय समय या सीमा की बाध्यता नहीं होगी। अवैध परिचालन और ओवरलोडिंग पर प्रभावी रोक लगाने के लिए उन्हें पूरी स्वतंत्रता दी गई है। इस दौरान स्थानीय पुलिस और संबंधित थानों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अनिवार्य रूप से सहयोग करना होगा।

राजस्व बढ़ाने की रणनीति
बता दें कि परिवहन विभाग राज्य के राजस्व संग्रह में एक प्रमुख स्तंभ माना जाता है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2008-09 में जहां परिवहन विभाग से ₹303.65 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ था, वहीं वित्तीय वर्ष 2024-25 में यह बढ़कर ₹3677.71 करोड़ तक पहुंच गया है। सरकार का मानना है कि प्रवर्तन पदाधिकारियों को सशक्त और स्वायत्त बनाकर इस राजस्व को और बढ़ाया जा सकता है।राजस्व वसूली और सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए विभाग ने यह भी निर्देश दिया है कि प्रवर्तन पदाधिकारियों को परीक्षा ड्यूटी या अन्य विधि-व्यवस्था संबंधी कार्यों में तैनात नहीं किया जाए। सरकार का कहना है कि ऐसी अतिरिक्त जिम्मेदारियों से अवैध वाहनों का संचालन बढ़ता है और राजस्व को नुकसान पहुंचता है।

भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस
जहां एक ओर अधिकारियों को अधिकार दिए गए हैं वहीं अधिकारों के साथ जवाबदेही भी तय की गई है। यदि किसी प्रवर्तन पदाधिकारी के खिलाफ अवैध वसूली की ठोस शिकायत सामने आती है, तो संबंधित पुलिस पदाधिकारी इसकी जांच कर विस्तृत रिपोर्ट परिवहन विभाग को सौंपेंगे। दोषी पाए जाने पर सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।बता दें कि परिवहन विभाग का यह फैसला जहां एक ओर अधिकारियों को कार्य करने की सुरक्षा और स्वतंत्रता देता है, वहीं दूसरी ओर पारदर्शिता, अनुशासन और राजस्व संरक्षण की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।