बिहार में वाहनों की फिटनेस जांच अब पूरी तरह हाई-टेक, हर जिले में खुलेंगे ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन
राज्य में सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब वाहनों की फिटनेस जांच पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक मशीनों के जरिए की जाएगी। बिहार परिवहन विभाग ने सभी जिलों में स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन–एटीएस) स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे फिटनेस जांच अधिक सटीक, पारदर्शी....
राज्य में सड़क सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। अब वाहनों की फिटनेस जांच पारंपरिक तरीके से नहीं, बल्कि अत्याधुनिक मशीनों के जरिए की जाएगी। बिहार परिवहन विभाग ने सभी जिलों में स्वचालित परीक्षण स्टेशन (ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन–एटीएस) स्थापित करने की प्रक्रिया तेज कर दी है, जिससे फिटनेस जांच अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज हो सके।
पहले चरण में राजधानी पटना सहित आधा दर्जन से अधिक जिलों में एटीएस संचालित हो रहे हैं। अब दूसरे चरण में राज्य के 27 और जिलों में इन आधुनिक परीक्षण केंद्रों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए विभाग ने सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पोर्टल के माध्यम से इच्छुक कंपनियों और व्यक्तियों से आवेदन आमंत्रित किए हैं। आवेदन की अंतिम तिथि 16 मार्च निर्धारित की गई है।विभागीय अधिकारियों के अनुसार, प्रत्येक जिले में औसतन करीब दस परीक्षण केंद्र स्थापित करने की योजना है। ये केंद्र निजी क्षेत्र की भागीदारी से संचालित होंगे, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और कार्यक्षमता सुनिश्चित होगी।
मशीनों से होगी पूरी जांच, तुरंत मिलेगा फिटनेस सर्टिफिकेट
ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन पर वाहनों की फिटनेस जांच पूरी तरह मशीन आधारित होगी। इसमें ब्रेक, क्लच, हार्न, हेडलाइट, स्पीडोमीटर, विंडो ग्लास, वाइपर और अन्य तकनीकी मानकों की वैज्ञानिक तरीके से जांच की जाएगी। जांच पूरी होते ही वाहन मालिकों को तुरंत फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी कर दिया जाएगा।अभी अधिकांश जिलों में फिटनेस जांच मोटरयान निरीक्षकों द्वारा मैनुअल तरीके से की जाती है, जिसमें मानवीय त्रुटि और अनियमितता की संभावना रहती है। नई मशीन आधारित प्रणाली से इन समस्याओं पर प्रभावी रोक लगेगी और फर्जी फिटनेस प्रमाण-पत्र जारी होने की संभावना भी समाप्त होगी।
सीसीटीवी निगरानी से बढ़ेगी पारदर्शिता
सभी एटीएस केंद्र सीसीटीवी कैमरों से लैस होंगे, जिससे पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जा सकेगी। इससे किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या भ्रष्टाचार पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी। विभाग का मानना है कि यह व्यवस्था सड़क सुरक्षा मानकों को और मजबूत करेगी।नई तकनीक लागू होने से पुराने, असुरक्षित और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान आसान हो जाएगी। इससे सड़क दुर्घटनाओं में कमी आने की उम्मीद है और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि सभी निजी और व्यावसायिक वाहन निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप हों।
इन जिलों में खुलेंगे नए एटीएस केंद्र
जिन जिलों में नए एटीएस स्थापित किए जाएंगे, उनमें मुंगेर, जमुई, शेखपुरा, बांका, अररिया, शिवहर, नवादा, सहरसा, किशनगंज, वैशाली, नालंदा, सारण, बेगूसराय, लखीसराय, बेतिया, मधेपुरा, अरवल, खगड़िया, औरंगाबाद, जहानाबाद, सीतामढ़ी, कटिहार, रोहतास, सुपौल, समस्तीपुर, सिवान और दरभंगा शामिल हैं।इन जिलों में एटीएस शुरू होने से वाहन मालिकों को अपने ही जिले में आधुनिक फिटनेस जांच की सुविधा मिलेगी, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होगी। परिवहन विभाग का मानना है कि यह पहल राज्य में सड़क सुरक्षा, पारदर्शिता और प्रशासनिक दक्षता की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित होगा।













