बिहार में पुरानी गाड़ियों पर बड़ा फैसला: नई स्क्रैप पॉलिसी की तैयारी

बिहार में सड़कों पर दौड़ रही पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को हटाने के लिए राज्य सरकार अब बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग एक नई और ज्यादा आकर्षक वाहन स्क्रैप नीति लाने की तैयारी में है, जिससे 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर वाहन मालिकों को पहले से कहीं ज्यादा लाभ मिल सके। राज्य सरकार इसके लिए झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों की सफल स्क्रैप ,...................

बिहार में पुरानी गाड़ियों पर बड़ा फैसला: नई स्क्रैप पॉलिसी की तैयारी

बिहार में सड़कों पर दौड़ रही पुरानी और प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियों को हटाने के लिए राज्य सरकार अब बड़ा और निर्णायक कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग एक नई और ज्यादा आकर्षक वाहन स्क्रैप नीति लाने की तैयारी में है, जिससे 15 साल से अधिक पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने पर वाहन मालिकों को पहले से कहीं ज्यादा लाभ मिल सके। राज्य सरकार इसके लिए झारखंड और उत्तर प्रदेश जैसे पड़ोसी राज्यों की सफल स्क्रैप नीतियों का अध्ययन कर रही है, ताकि बिहार की नीति को ज्यादा व्यावहारिक और लाभकारी बनाया जा सके।

25 लाख से ज्यादा पुरानी गाड़ियां, लेकिन स्क्रैप नाममात्र
बिहार में इस समय 15 साल से अधिक पुराने वाहनों की संख्या 25 लाख से ज्यादा है, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक दो हजार से भी कम वाहन स्क्रैप हो पाए हैं। यह साफ संकेत है कि मौजूदा स्क्रैप नीति आम वाहन मालिकों को प्रोत्साहित करने में नाकाम रही है।बिहार की वर्तमान स्क्रैप नीति 31 मार्च 2026 तक प्रभावी है। इसके तहत निजी वाहनों पर 25 प्रतिशत तक टैक्स में छूट,व्यावसायिक वाहनों पर 15 प्रतिशत तक टैक्स में छूट, पुराने बकाया टैक्स और जुर्माने में राहत जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं। इसके बावजूद बड़ी संख्या में वाहन मालिक बिहार की बजाय पड़ोसी राज्यों में अपनी गाड़ियां स्क्रैप करा रहे हैं, जिससे राज्य को राजस्व का नुकसान हो रहा है।

झारखंड-यूपी की नीति क्यों है ज्यादा कारगर?
बता दें कि झारखंड में 15 साल से पुराने सरकारी और व्यावसायिक वाहन तथा 20 साल से पुराने निजी वाहन स्क्रैप के दायरे में आते हैं। वहां नए वाहन खरीदने पर रोड टैक्स में छूट,रजिस्ट्रेशन शुल्क की पूरी माफी,वाहन कंपनियों की ओर से अतिरिक्त डिस्काउंट मिलता है। यही वजह है कि बिहार के वाहन मालिक वहां जाकर स्क्रैप कराना ज्यादा फायदेमंद समझते हैं।

नई नीति में मिल सकती हैं ये बड़ी राहतें
परिवहन विभाग की तैयारी है कि नई स्क्रैप नीति में इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बैट्री से चलने वाले वाहनों को बढ़ावा दिया जाए। ऐसे वाहनों की खरीद पर शत-प्रतिशत टैक्स और रजिस्ट्रेशन शुल्क में छूट दी जा सकती है। इसके अलावा, वाहन स्क्रैप कराने पर पुराने बकाया टैक्स और जुर्माने को पूरी तरह माफ करने पर भी विचार हो रहा है। वहीं सरकारी विभागों की 15 साल से अधिक पुरानी गाड़ियों को अनिवार्य रूप से स्क्रैप करने की योजना है, जबकि निजी वाहनों के रजिस्ट्रेशन को अधिकतम पांच साल तक ही बढ़ाने की अनुमति मिल सकती है।

प्रदूषण नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की कोशिश
राज्य सरकार का मानना है कि अगर स्क्रैप नीति को ज्यादा सरल, व्यावहारिक और लाभकारी बनाया गया, तो एक ओर जहां सड़कों से जर्जर वाहन हटेंगे, वहीं दूसरी ओर प्रदूषण पर भी लगाम लगेगी और राज्य के राजस्व में भी बढ़ोतरी होगी।राज्य में 20 वाहन स्क्रैप सेंटर खोलने की मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। अब देखना यह है कि प्रस्तावित नई नीति कागजों से निकलकर जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती है।