आरक्षण के मुद्दे पर बिहार एनडीए में घमासान; सब-कोटे की मांग पर भिड़े चिराग और मांझी, इस्तीफे की मांग से सियासत गरमाई
बिहार में एनडीए के भीतर एससी-एसटी आरक्षण में सब-कोटा और आरक्षण की समीक्षा को लेकर घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के सवाल पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। इस तकरार ने उस वक्त बड़ा मोड़ ले लिया जब चिराग पासवान ने आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट रुख की मांग करते हुए जीतन राम मांझी और उनके बेटे मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे तक की मांग कर डाली।
DESWA DESK : बिहार में एनडीए के भीतर एससी-एसटी आरक्षण में सब-कोटा और आरक्षण की समीक्षा को लेकर घमासान तेज हो गया है। केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान तथा हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) के प्रमुख व केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बीच आरक्षण के सवाल पर तीखी जुबानी जंग छिड़ गई है। इस तकरार ने उस वक्त बड़ा मोड़ ले लिया जब चिराग पासवान ने आरक्षण के संवेदनशील मुद्दे पर स्पष्ट रुख की मांग करते हुए जीतन राम मांझी और उनके बेटे मंत्री डॉ. संतोष कुमार सुमन के इस्तीफे तक की मांग कर डाली।
आरक्षण में सब-कोटे की मांग और समीक्षा को लेकर दोनों घटकों के विचार पूरी तरह आमने-सामने आ गए हैं। केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बिहार सरकार के मंत्री संतोष सुमन का तर्क है कि आजादी के दशकों बाद भी दलित समाज की कुछ विशेष जातियों को आरक्षण का समुचित लाभ नहीं मिल सका है। उनका कहना है कि सब-कोटा के जरिए सबसे वंचित वर्गों तक आरक्षण का लाभ पहुंचाना जरूरी है। इसके लिए आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा की जानी चाहिए।
वहीं, केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने सब कोटे और समीक्षा की मांग का पुरजोर विरोध करते हुए इसे आरक्षण को धीरे-धीरे खत्म करने की गहरी साजिश करार दिया है। चिराग ने साफ कहा कि एससी-एसटी आरक्षण का आधार आर्थिक नहीं, बल्कि सदियों से चला आ रहा सामाजिक भेदभाव और छुआछूत है। सब कोटा लागू करने से दलित समाज आपस में बंट जाएगा, जिससे उनकी राजनीतिक ताकत कमजोर होगी।
चिराग पासवान ने बेहद सख्त तेवर अपनाते हुए कहा कि आरक्षण जैसे अत्यंत संवेदनशील और संवैधानिक मुद्दे पर कोई भी ढुलमूल रवैया स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि एनडीए के सहयोगी दल के नेता आरक्षण की मूल भावना और इसके दायरे को कमजोर करने वाले बयान दे रहे हैं, तो उन्हें नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से तत्काल इस्तीफा देना चाहिए।
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण कोई खैरात या राहत नहीं, बल्कि संविधान से मिला अधिकार है। जब तक मैं हूं, आरक्षण और संविधान की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा। समीक्षा के नाम पर दलितों के अधिकार छीनने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। बिहार में दो बड़े दलित चेहरों के आमने-सामने आने से एनडीए के भीतर आंतरिक दरारें सतह पर आ गई हैं। विपक्ष जहां इस मुद्दे पर चुटकी ले रहा है, वहीं भाजपा और जदयू के लिए दोनों सहयोगियों को एक मंच पर लाना बड़ी चुनौती बनता दिख रहा है।













