भरत तिवारी एनकाउंटर पर मांझी के बयान से घमासान: संगीन आरोपों से घिरे सलाहकार दानिश रिजवान पर उठने लगे सवाल
भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की सियासत में उबाल आ गया है। एक तरफ जहां इस मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है और आरोपी पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद सरकार बैकफुट पर है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के एक बयान ने नए सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। भरत तिवारी को 'आदतन अपराधी' साबित करने की कोशिश में जुटे मांझी अब खुद अपने ही बिछाए जाल में फंसते नजर आ रहे हैं।
DESWA DESK : भरत तिवारी कथित एनकाउंटर मामले को लेकर बिहार की सियासत में उबाल आ गया है। एक तरफ जहां इस मामले की न्यायिक जांच शुरू हो चुकी है और आरोपी पुलिस अधिकारियों पर मुकदमा दर्ज होने के बाद सरकार बैकफुट पर है, वहीं दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री और पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी के एक बयान ने नए सियासी विवाद को जन्म दे दिया है। भरत तिवारी को 'आदतन अपराधी' साबित करने की कोशिश में जुटे मांझी अब खुद अपने ही बिछाए जाल में फंसते नजर आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से गूंज रहा है कि अगर चंद मुकदमों की वजह से भरत तिवारी अपराधी हैं, तो कई राज्यों में हत्या के प्रयास और दुष्कर्म की कोशिश जैसे बेहद संगीन मामलों के आरोपी और मांझी के बेहद करीबी सलाहकार दानिश रिजवान शरीफ कैसे हो सकते हैं?
केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी ने भरत तिवारी पर तीखा हमला बोलते हुए पुलिसिया कार्रवाई को जायज ठहराया है। मांझी ने सवालिया लहजे में कहा कि अगर वह विक्षिप्त या बहुत अच्छा इंसान था, तो उसके पास ढाई लाख रुपये का अवैध रिवॉल्वर कहां से आया? उस पर एससी-एसटी एक्ट का केस क्यों दर्ज था? साफ है कि वह आदतन अपराधी था और उस दिन ऐसा लगा कि वह पुलिस को मार देगा। पुलिस ने जो किया, ठीक किया। जब तक अपराधियों में डर नहीं होगा, तब तक कानून-व्यवस्था ठीक नहीं हो सकती। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाफ या फुल एनकाउंटर का जो एक्शन लिया है, वह बेहद सराहनीय निर्णय है।
मांझी के इस बयान के बाद विपक्ष और आम जनता ने उनके अपने सलाहकार दानिश रिजवान के आपराधिक इतिहास को खंगालना शुरू कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि जिसे मांझी अपने बगल में बिठाते हैं, जिस पर बिहार से लेकर झारखंड तक के थानों में गंभीर धाराओं में केस दर्ज हैं, क्या वह आदतन अपराधी की श्रेणी में नहीं आता? दानिश रिजवान पर हत्या का प्रयास, मारपीट, दुष्कर्म की कोशिश और पुलिस के हथियार से हर्ष फायरिंग करने जैसे बेहद संगीन आरोप हैं। हत्या के प्रयास के एक मामले में दानिश रिजवान को जेल की हवा भी खानी पड़ी है। पटना से लेकर भोजपुर और झारखंड के थानों में उनके खिलाफ कई मामले लंबित हैं।
हद तो तब हो गई जब इसी साल यानी मार्च 2026 में दानिश रिजवान का एक और विवादित वीडियो सामने आया। इंटरनेट मीडिया पर उनके द्वारा कथित रूप से हर्ष फायरिंग करने का वीडियो वायरल होने के बाद भोजपुर के नगर थाने में पुलिस ने खुद संज्ञान लिया। यह प्राथमिकी 26 मार्च 2026 को दारोगा नुमान अली शौकत के बयान पर दर्ज की गई। पुलिस जांच में वीडियो में फायरिंग करने वाले व्यक्ति की पहचान दानिश रिजवान के रूप में हुई। पुलिस का साफ कहना है कि हर्ष फायरिंग एक संज्ञेय और गंभीर अपराध है, इसलिए यह कानूनी कार्रवाई की गई है।
हालांकि, इस पूरे मामले पर दानिश रिजवान ने अपने ऊपर लगे आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका दावा है कि यह वीडियो पूरी तरह से फर्जी, पुराना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा जनरेटेड है। मुझे फंसाने की साजिश की जा रही है। इसी तरह की एक घटना को लेकर साल 2017 में भी कार्रवाई हो चुकी है, जिसके बाद मेरे हथियार का लाइसेंस भी रद्द कर दिया गया था।
भरत तिवारी के सरेंडर करने के वीडियो के बाद जहां पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठे हैं और न्यायिक जांच जारी है, वहीं जीतनराम मांझी द्वारा पुलिस को क्लीन चिट देना और पीड़ित को आदतन अपराधी बताना उनकी राजनीतिक हताशा को दर्शाता है। अब जनता सीधे मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री से पूछ रही है कि क्या कानून के तराजू के दो पलड़े हैं? अगर रिवॉल्वर रखने और केस दर्ज होने मात्र से भरत तिवारी अपराधी घोषित हो जाते हैं, तो हत्या के प्रयास और हर्ष फायरिंग के मुकदमों का सामना कर रहे दानिश रिजवान को सरकारी संरक्षण और सलाहकार का वीआईपी दर्जा क्यों मिला हुआ है? इस दोहरे मापदंड ने सम्राट सरकार की 'जीरो टॉलरेंस' नीति को कटघरे में खड़ा कर दिया है।













