बिहार की हालत पर तेजस्वी यादव का बड़ा बयान, डबल इंजन सरकार पर उठाए सवाल,बोले—गरीबी, बेरोजगारी और पलायन में सबसे पीछे
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। गुरुवार सुबह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बिहार को ‘अनोखा और अनूठा’ प्रदेश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार के लंबे शासन के बावजूद बिहार आज भी विकास के कई पैमानों पर पिछड़ा हुआ है। तेजस्वी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही....
बिहार की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी तेज हो गई है। गुरुवार सुबह नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने राज्य की एनडीए सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बिहार को ‘अनोखा और अनूठा’ प्रदेश करार दिया। उन्होंने दावा किया कि डबल इंजन सरकार के लंबे शासन के बावजूद बिहार आज भी विकास के कई पैमानों पर पिछड़ा हुआ है। तेजस्वी की यह पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।
बिहार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है
सोशल मीडिया पर किए गए अपने पोस्ट में तेजस्वी यादव ने कहा कि बिहार में वर्षों से एनडीए की डबल इंजन सरकार है, लेकिन इसके बावजूद राज्य गरीबी, बेरोजगारी, अपराध और पलायन जैसे मुद्दों पर देश के सबसे पिछड़े राज्यों में गिना जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बहुआयामी गरीबी के मामले में भी बिहार की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि बिहार में स्कूल ड्रॉपआउट की संख्या काफी अधिक है और साक्षरता दर भी देश में सबसे कम मानी जाती है। इसके साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में औद्योगिक इकाइयों की संख्या बेहद कम है, जिसके कारण रोजगार के अवसर सीमित हैं और बड़ी संख्या में युवाओं को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ता है।
इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए
तेजस्वी यादव ने महंगाई को भी बड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि बिहार में गैस सिलेंडर, बिजली और पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से आम जनता परेशान है। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि कई इलाकों में जमीन और प्रॉपर्टी की कीमतें दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के बराबर या उससे अधिक हो चुकी हैं।अपने बयान के अंत में तेजस्वी यादव ने एनडीए सरकार के ‘सुशासन’ के दावों पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि 21 वर्षों के शासन के बाद भी बिहार विकास के अधिकतर मानकों पर पीछे है, तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। उनका आरोप है कि राजनीतिक दल सत्ता का आनंद लेने में व्यस्त हैं, जबकि राज्य के समग्र विकास के मुद्दे पर गंभीरता नहीं दिखाई जा रही।













