बांकीपुर उपचुनाव : अब बीजेपी उम्मीदवार के हलफनामे पर विवाद, दसवीं के बाद सीधे ग्रेजुएशन? 12वीं पर घिरी पार्टी
राजधानी पटना की सबसे हॉट और हाईप्रोफाइल सीट बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। लेकिन ऐसा लगता है कि इस सीट पर पार्टी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले उम्मीदवार के ऐन वक्त पर पैर पीछे खींचने का झटका और अब नए उम्मीदवार के चुनावी हलफनामे में 12वीं की डिग्री ने राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
DESWA DESK : राजधानी पटना की सबसे हॉट और हाईप्रोफाइल सीट बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा की जंग बन चुका है। लेकिन ऐसा लगता है कि इस सीट पर पार्टी की मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। पहले उम्मीदवार के ऐन वक्त पर पैर पीछे खींचने का झटका और अब नए उम्मीदवार के चुनावी हलफनामे में 12वीं की डिग्री ने राजनीतिक गलियारों में एक नया विवाद खड़ा कर दिया है।
13 जुलाई को भाजपा प्रत्याशी नीरज कुमार सिन्हा द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्र के साथ सौंपे गए शैक्षणिक योग्यता के ब्योरे पर अब विपक्ष और सोशल मीडिया ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। नीरज कुमार सिन्हा द्वारा चुनाव आयोग के समक्ष दाखिल किए गए हलफनामे के अनुसार उन्होंने 2012 में बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड (BSEB) से मैट्रिक की परीक्षा पास की, और स्नातक 2024 में मगध महाविद्यालय से की है। उन्होंने बताया है कि गोना के एक स्कूल से मैट्रिक और जहानाबाद जिले के शकुराबाद के कॉलेज से स्नातक की परीक्षा पास की है, जबकि हलफनामे में इंटरमीडिएट का कोई उल्लेख नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों और विरोधियों की नजर जैसे ही इस हलफनामे पर पड़ी, चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया। सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि साल 2012 में मैट्रिक पास करने के बाद उम्मीदवार ने सीधे साल 2024 में स्नातक की डिग्री कैसे हासिल कर ली? देश की सामान्य शिक्षा व्यवस्था के तहत किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से ग्रेजुएशन करने के लिए 12वीं (इंटरमीडिएट) की परीक्षा पास करना अनिवार्य है। ऐसे में हलफनामे में इंटरमीडिएट की पढ़ाई या डिग्री का जिक्र न होना कई तरह के संदेह पैदा कर रहा है।
अब सवाल उठ रहा है कि क्या हलफनामा भरने में कोई मानवीय भूल हुई है? क्या उम्मीदवार के पास इंटरमीडिएट की वैध डिग्री नहीं है? या फिर इसके पीछे कोई अन्य तकनीकी कारण है, जिसे सार्वजनिक नहीं किया गया? इस बारे में अबतक बीजेपी की ओर से भी कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। खुद नीरज सिन्हा भी इसका जवाब नहीं दे रहे हैं।
बांकीपुर सीट पारंपरिक रूप से भाजपा का मजबूत गढ़ रही है, लेकिन इस उपचुनाव में पार्टी शुरुआत से ही 'बैकफुट' पर नजर आ रही है। दरअसल. पहले घोषित प्रत्याशी अभिषेक बंटी ने नामांकन के ठीक एक दिन बाद चुनाव लड़ने से मना कर दिया, जिससे भाजपा को आनन-फानन में नीरज कुमार सिन्हा को उतारना पड़ा। नीरज के नाम की घोषणा के बाद जारी उनके पहले बायोडेटा पर भी राजनीतिक हलकों में सवाल उठे थे। उन्हें 12 वर्ष की उम्र में भाजपा का प्राथमिक सदस्य बताया गया था, उसके बाद नया बायोडाटा जारी किया गया। नामांकन के आखिरी चरणों में शैक्षणिक योग्यता का यह विवाद पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकता है, खासकर तब जब जन सुराज जैसी पार्टियां शिक्षित और योग्य नेतृत्व के नारे पर चुनाव लड़ रही हैं।
इस मामले के सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स एक्स और फेसबुक पर मीम्स और तंज की बाढ़ आ गई है। फिलहाल, इस पूरे विवाद पर भाजपा नेतृत्व और खुद उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा की ओर से कोई आधिकारिक सफाई सामने नहीं आई है। देखना दिलचस्प होगा कि डैमेज कंट्रोल में माहिर भाजपा बिना इंटरमीडिएट के स्नातक वाली डिग्री की गुत्थी को जनता के सामने कैसे सुलझाती है।













