बिहार में अपराधियों पर कसा शिकंजा; अब डीएम को मिले ये अधिकार, खनन माफिया और पेपर लीक गिरोह पर लगेगा सीसीए

राज्य में संगठित अपराध, भू-माफिया, खनन माफिया, पेपर लीक गिरोह और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) में किए गए नए संशोधनों के तहत अब जिलाधिकारियों (डीएम) को संगठित अपराध में संलिप्त अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार दे दिए गए हैं।

बिहार में अपराधियों पर कसा शिकंजा; अब डीएम को मिले ये अधिकार, खनन माफिया और पेपर लीक गिरोह पर लगेगा सीसीए

DESWA DESK : राज्य में संगठित अपराध, भू-माफिया, खनन माफिया, पेपर लीक गिरोह और सोशल मीडिया पर नफरत फैलाने वाले असामाजिक तत्वों पर नकेल कसने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बिहार अपराध नियंत्रण अधिनियम (सीसीए) में किए गए नए संशोधनों के तहत अब जिलाधिकारियों (डीएम) को संगठित अपराध में संलिप्त अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के व्यापक अधिकार दे दिए गए हैं।

नए नियमों के अनुसार जिलाधिकारियों को अब सात बड़े और गंभीर अपराधों में शामिल असामाजिक तत्वों पर सीधे सीसीए लगाने की मंजूरी मिल गई है। सरकार द्वारा जारी नई नियमावली के तहत अब डीएम प्रतियोगी या शैक्षणिक परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक करने वाले गिरोह, सार्वजनिक या निजी संपत्ति को गैरकानूनी तरीके से बड़ा नुकसान पहुंचाने वाले और किसी की संपत्ति पर अवैध कब्जा कर असली मालिक को बेदखल करने वाले भू-माफिया, बालू, गिट्टी व अन्य खनिजों का अवैध उत्खनन करने वाले माफिया पर सीसीए के तहत कार्रवाई कर सकेंगे।

 इसके अलावा, जाति, धर्म, भाषा या समुदाय के आधार पर सोशल मीडिया पर वैमनस्य और नफरत फैलाने वाले तत्व, महिलाओं और बच्चों की तस्करी में संलिप्त अपराधी, बम, गोली, हथियार और विस्फोटक सामग्री रखने अथवा उनके अवैध व्यापार में शामिल अपराधियों पर सीसीए के तहत कार्रवाई होगी। संशोधित अधिनियम के तहत डीएम को दो मुख्य और कड़े अधिकार दिए गए हैं। चिह्नित अपराधी को जिले या उसके किसी विशिष्ट क्षेत्र से बाहर निकालने का आदेश डीएम दे सकते हैं। 

अपराधी को समय-समय पर संबंधित थाने में उपस्थित होकर अपनी गतिविधियों की जानकारी देनी होगी।  डीएम द्वारा जारी किए गए इन आदेशों की हर छह महीने में समीक्षा की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर इसे छह-छह महीने के लिए बढ़ाया जा सकेगा। यदि पीड़ित या प्रभावित पक्ष डीएम के आदेश से असंतुष्ट है, तो उसे प्रमंडलीय आयुक्त  के समक्ष अपील करने का अधिकार होगा।

2024 से लागू बिहार सीसीए एक्ट में पहले पुरानी भारतीय दंड संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 1872 की धाराएं शामिल थीं, जिससे अदालत में अभियोजन के दौरान कई तकनीकी अड़चनें आती थीं। सरकार ने अब इन पुरानी धाराओं को हटाकर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम 2023 की नई धाराओं को अधिनियम में शामिल कर दिया है। इस तकनीकी बदलाव से न्यायालयों में अपराधियों को त्वरित सजा दिलाने का रास्ता साफ हो गया है।