बिहार में अब घर बैठे म्यूटेशन, मृत रैयतों के वारिसों को जमाबंदी के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर; राजस्व कर्मचारी खुद जाएंगे गांवों में

बिहार में अब मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम पर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही बार-बार आवेदन देने की औपचारिकता से गुजरना होगा। राज्य सरकार ने जमीन विवादों को खत्म करने और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है।

बिहार में अब घर बैठे म्यूटेशन, मृत रैयतों के वारिसों को जमाबंदी के लिए नहीं काटने होंगे दफ्तर के चक्कर; राजस्व कर्मचारी खुद जाएंगे गांवों में

DESWA DESK : बिहार में अब मृत जमाबंदी रैयतों के उत्तराधिकारियों को अपने नाम पर दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) कराने के लिए वर्षों तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे और न ही बार-बार आवेदन देने की औपचारिकता से गुजरना होगा। राज्य सरकार ने जमीन विवादों को खत्म करने और भूमि रिकॉर्ड को पारदर्शी बनाने के लिए एक ऐतिहासिक पहल शुरू की है। अब राजस्व कर्मचारी खुद गांव-गांव जाकर ऐसे मामलों की पहचान करेंगे और स्वतः संज्ञान लेते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू करेंगे।

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने इस संबंध में सभी प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। इस संबंध में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने कहा कि सरकार की मंशा साफ है कि जानकारी के अभाव या प्रशासनिक सुस्ती के कारण राज्य के किसी भी परिवार को उसके वैधानिक अधिकार से वंचित न होना पड़े। जमीन के मूल रैयत की मृत्यु के बाद भी वर्षों तक जमाबंदी उनके नाम पर लंबित रहने के कारण परिवारों में आपसी विवाद, मुकदमेबाजी और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भारी कठिनाइयां आती हैं। सरकार की इस सीधी पहल से जमीन से जुड़े विवादों में भारी कमी आने की उम्मीद है।

इस नई व्यवस्था को कड़ाई से लागू करने के लिए सरकार ने कड़े नियम तय किए हैं। प्रत्येक राजस्व कर्मचारी को अपने क्षेत्र (मौजा) में हर महीने कम-से-कम पांच मृत जमाबंदी धारकों के रिकॉर्ड को अद्यतन करना अनिवार्य होगा। अंचल अधिकारी (सीओ) हर महीने इसका लक्ष्य तय करेंगे। अपर समाहर्ता (एडीएम) और भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) हर महीने के पहले सप्ताह में अंचलवार इसकी समीक्षा करेंगे। निर्धारित लक्ष्य को पूरा न करने या कार्य में उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ सख्त अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी।

जांच के बाद राजस्व कर्मचारी सीधे उत्तराधिकारियों से संपर्क कर जरूरी दस्तावेज मांगेंगे। यदि परिवार आपसी बंटवारे के कागजात समय पर उपलब्ध नहीं करा पाता है, तब भी राजस्व कर्मचारी केवल उत्तराधिकार के आधार पर नामांतरण (म्यूटेशन) की कार्रवाई शुरू कर देंगे। यह पूरा अभियान पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगा। इसकी सभी प्रक्रियाएं biharbhumi.bihar.gov.in पोर्टल पर ऑनलाइन माध्यम से संपन्न की जाएंगी। विभागीय स्तर पर साप्ताहिक बैठकों में भी इसकी प्रगति की अनिवार्य रूप से मॉनिटरिंग की जाएगी। यह मुहिम केवल दाखिल-खारिज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बिहार के भूमि अभिलेखों को पूरी तरह अपडेट, विवाद मुक्त और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। इससे राज्य के लाखों परिवारों को समय पर उनका मालिकाना हक मिल सकेगा।