पंचायत चुनाव से पहले बड़ा बदलाव : परिसीमन से 60 फीसदी तक बढ़ेंगे मुखिया और सरपंच के पद, 13 हजार पहुंच सकती है पंचायतों की संख्या
बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य में जल्द ही ग्राम पंचायतों का नए सिरे से व्यापक परिसीमन किया जाएगा। 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा। इस नए परिसीमन के लागू होने के बाद प्रदेश में न केवल ग्राम पंचायतों की संख्या में भारी इजाफा होगा, बल्कि मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और ग्राम कचहरी से जुड़े प्रतिनिधियों के पदों की संख्या में भी लगभग 60 फीसदी तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
DESWA DESK : बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों से पहले बड़े बदलाव की तैयारी शुरू हो चुकी है। राज्य में जल्द ही ग्राम पंचायतों का नए सिरे से व्यापक परिसीमन किया जाएगा। 2011 की जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होगा। इस नए परिसीमन के लागू होने के बाद प्रदेश में न केवल ग्राम पंचायतों की संख्या में भारी इजाफा होगा, बल्कि मुखिया, सरपंच, वार्ड सदस्य और ग्राम कचहरी से जुड़े प्रतिनिधियों के पदों की संख्या में भी लगभग 60 फीसदी तक की अभूतपूर्व बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।
वर्तमान में बिहार में करीब 8053 ग्राम पंचायतें हैं। पंचायती राज विभाग की नई परिसीमन योजना के तहत आबादी और प्रशासनिक सुगमता को आधार बनाकर बड़ी पंचायतों को पुनर्गठित किया जाएगा। अनुमान है कि परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद राज्य में ग्राम पंचायतों की कुल संख्या बढ़कर करीब 13 हजार तक पहुंच जाएगी।
इस फैसले से सीधे तौर पर करीब पांज हजार नई पंचायतों का सृजन होगा, जिसका सीधा मतलब है कि राज्य में मुखिया और सरपंच के पांच हजार से ज्यादा नए पद जुड़ जाएंगे। नई प्रस्तावित व्यवस्था के अनुसार करीब सात हजार की आबादी पर एक ग्राम पंचायत और करीब पांच सौ की आबादी पर एक वार्ड बनाने का प्रावधान किया गया है।
अब उम्मीदवारों को नए आरक्षण और सीमाओं का इंतजार है, क्योंकि अब परिसीमन के बाद ही बिहार में पंचायत चुनाव संभव हो सकेंगे। हालांकि, राज्य निर्वाचन आयोग और प्रशासन की ओर से पंचायत चुनाव की तारीखों को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं की गई है। माना जा रहा है कि पूरा चुनाव कार्यक्रम अब परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही घोषित किया जाएगा।
इस बड़े प्रशासनिक फेरबदल से पंचायत चुनाव में ताल ठोकने की तैयारी कर रहे भावी उम्मीदवारों का समीकरण बदल गया है। जिन इलाकों में एक ही बड़ी पंचायत के तहत कई गांव आते थे, वहां अब नए वार्डों और नई पंचायतों का गठन होगा। ऐसे में संभावित प्रत्याशियों को अब नई सीमाओं के अंतिम प्रकाशन और नए सिरे से लागू होने वाली आरक्षण व्यवस्था का इंतजार करना होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायतों के पुनर्गठन से पंचायतों का आकार छोटा और सुव्यवस्थित होगा। इससे न केवल सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक आसानी से पहुंचेगा, बल्कि ज्यादा से ज्यादा स्थानीय युवाओं और समाजसेवियों को त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में प्रतिनिधित्व करने का मौका भी मिलेगा।













