सहयोग कार्यक्रम में मंत्री के सामने महिला का हंगामा, कहा-भू-माफियाओं के सामने हम बेबस...गरीबों की कोई नहीं सुनता
बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग कार्यक्रम उस वक्त अचानक हंगामेदार हो गया, जब अधिकारियों के रवैये से आहत पीड़ितों ने मंत्रियों के समक्ष ही अपनी आपबीती सुनाते हुए जमकर नाराजगी जताई। दिल्ली में मामूली वेतन पर गुजारा करने वाले एक दंपती का एक ही दर्द था-गांव में उनकी पुश्तैनी जमीनों पर भू-माफियाओं का कब्जा और सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने के बावजूद कोई सुनवाई न होना।
DESWA DESK : बीजेपी के प्रदेश कार्यालय में आयोजित सहयोग कार्यक्रम उस वक्त अचानक हंगामेदार हो गया, जब अधिकारियों के रवैये से आहत पीड़ितों ने मंत्रियों के समक्ष ही अपनी आपबीती सुनाते हुए जमकर नाराजगी जताई। दिल्ली में मामूली वेतन पर गुजारा करने वाले एक दंपती का एक ही दर्द था-गांव में उनकी पुश्तैनी जमीनों पर भू-माफियाओं का कब्जा और सरकारी दफ्तरों के अनगिनत चक्कर काटने के बावजूद कोई सुनवाई न होना।
हंगामे का केंद्र दरभंगा से पहुंची एक महिला की बेबसी बनी। महिला ने राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल और शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के सामने अपना दर्द बयां करते हुए कहा मैं दिल्ली में महज सात हजार की नौकरी करती हूं और मेरे पति ₹ दस हजार कमाते हैं। दरभंगा में हमारी जमीन पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया है। हम दूसरी बार बीजेपी दफ्तर के सहयोग कार्यक्रम में आए हैं। यहां शिकायत तो लिख ली जाती है, लेकिन डीएम और सीओ दफ्तर में फाइल दबाकर बैठ जाते हैं।
इसी तरह सीतामढ़ी से आई एक अन्य पीड़ित महिला और मौलास से पहुंचे एक बुजुर्ग ने भी रुंधे गले से अधिकारियों की संवेदनहीनता उजागर की। फरियादियों का कहना था कि अंचल कार्यालय (सीओ) से लेकर जिलाधिकारी (डीएम) तक के चक्कर काटकर वे थक चुके हैं, लेकिन भू-माफियाओं के रसूख के आगे स्थानीय प्रशासन पूरी तरह लाचार नजर आता है। सहयोग कार्यक्रम में यूं तो शिक्षा विभाग समेत कई विभागों से जुड़ी समस्याएं आईं, लेकिन सबसे ज्यादा मामले जमीन पर अवैध कब्जे, दबंगई और राजस्व अधिकारियों की लापरवाही से जुड़े रहे।
जनता के बीच से उठे इस आक्रोश से एक बार फिर साफ हो गया है कि राज्य में जमीन विवाद और भू-माफियाओं का सिंडिकेट एक बेहद संवेदनशील और विकराल रूप ले चुका है। हंगामे और फरियादियों के गुस्से को देखते हुए सहयोग कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों ने खुद पहल कर पीड़ितों से अलग से बातचीत की। मंत्रियों ने सभी फरियादियों की शिकायतों को ध्यानपूर्वक सुना, उनके दस्तावेज देखे और संबंधित जिलों के प्रशासनिक अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर जांच कर कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
अब देखना यह होगा कि सहयोग कार्यक्रम के इस मंच से मिले आश्वासनों के बाद धरातल पर अंचलाधिकारी और पुलिस-प्रशासनिक अमला माफियाओं पर शिकंजा कसता है या फरियादियों को फिर किसी दफ्तर के चक्कर काटने पड़ेंगे।













