बिहार कैबिनेट का बड़ा फैसला : एससी-एसटी मामलों के जल्द निपटारे के लिए 19 नए विशेष न्यायालय, 171 पदों का सृजन; 17 एजेंडों पर लगी मुहर
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण से जुड़े 17 एजेंडों को स्वीकृति प्रदान की गई है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं सोशल मीडिया के जरिए कैबिनेट में मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्तावों की जानकारी साझा की।
DESWA DESK : मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बिहार कैबिनेट की महत्वपूर्ण बैठक में राज्य के विकास और प्रशासनिक सुदृढ़ीकरण से जुड़े 17 एजेंडों को स्वीकृति प्रदान की गई है। बैठक के बाद मुख्यमंत्री ने स्वयं सोशल मीडिया के जरिए कैबिनेट में मंजूर किए गए प्रमुख प्रस्तावों की जानकारी साझा की।
कैबिनेट बैठक में सबसे महत्वपूर्ण फैसला अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के तहत लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे को लेकर लिया गया। राज्य के 19 जिलों में 19 अतिरिक्त अन्य विशेष न्यायालयों की स्थापना की मंजूरी दी गई है। पश्चिम चंपारण (बेतिया), मधुबनी, भोजपुर (आरा), सिवान, अररिया, सुपौल, खगड़िया, जहानाबाद, बक्सर, जमुई, कैमूर (भभुआ), कटिहार, सीतामढ़ी, मुंगेर, मधेपुरा, बांका, शेखपुरा, औरंगाबाद और लखीसराय में इन विशेष न्यायालयों की स्थापना की जाएगी।
इन न्यायालयों के सुचारू संचालन के लिए जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश न्यायालयों के स्तर पर अराजपत्रित कोटि के कुल 171 नए पदों के सृजन की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है। वहीं, राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सर्वसुलभ बनाने के लिए पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर 16 नए मेडिकल कॉलेज सह अस्पतालों के संचालन की योजना को मंजूरी दी गई है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना में परामर्श और प्रबंधन के लिए पीडब्ल्यूसी को ट्रांजैक्शन एडवाइजर के रूप में नियुक्त करने की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
केंद्र प्रायोजित अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के अंतर्गत जमालपुर जलापूर्ति परियोजना के लिए 102.22 करोड़ तथा मुंगेर जलापूर्ति परियोजना के लिए 177.72 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इन योजनाओं से दोनों नगरों में स्वच्छ एवं नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
इसके अलावा राज्य में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हर घर तिरंगा अभियान के भव्य एवं सफल आयोजन के लिए बिहार सरकार ने अपनी मंजूरी दे दी है। पूर्वी चंपारण के पीपराकोठी स्थित सरकारी भूमि को केंद्रीय विद्यालय की स्थापना के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को सौंपने की मंजूरी दी गई। यह भूमि 30 वर्षों की लीज पर दी जाएगी, जिसे आगे नवीकृत करने का विकल्प भी उपलब्ध रहेगा।
इसे शिक्षा के क्षेत्र में सरकार का एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पूर्वी चंपारण जिले के पीपराकोठी स्थित सरकारी भूमि पर केंद्रीय विद्यालय के संचालन के लिए भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय को 30 वर्षों के लिए लीज नवीकरण विकल्प के साथ भूमि उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। यह निर्णय क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा।













