बिहार में खासमहाल जमीन पर रहने वालों को मिलेगा मालिकाना हक: 15 अगस्त के बाद शुरू होगी प्रक्रिया, नीति बनाएगी सरकार
बिहार के पटना, सासाराम, पूर्णिया और कटिहार जैसे प्रमुख शहरों में दशकों से खासमहाल की जमीन पर बसे लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार अब उन्हें इस जमीन का असली मालिक बनाने जा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सूचना भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह बड़ा ऐलान किया।
DESWA DESK : बिहार के पटना, सासाराम, पूर्णिया और कटिहार जैसे प्रमुख शहरों में दशकों से खासमहाल की जमीन पर बसे लाखों परिवारों के लिए राहत भरी खबर है। राज्य सरकार अब उन्हें इस जमीन का असली मालिक बनाने जा रही है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने सूचना भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में यह बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार आगामी 15 अगस्त के बाद इस दिशा में तेजी से कदम बढ़ाएगी और इसके बाद लोगों को उनकी जमीन का मालिकाना हक (फ्री होल्ड) सौंप दिया जाएगा।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भूमि सुधार मंत्री डॉ. जायसवाल ने कहा कि राज्य के कई जिलों में खासमहाल की भूमि पर लोग पिछले 60 से 70 वर्षों से रह रहे हैं। मालिकाना हक नहीं मिलने के कारण इन लोगों को लंबे समय से कई तरह की प्रशासनिक और कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस गंभीर समस्या को देखते हुए विभाग ने अब एक ठोस और स्थायी समाधान निकालने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद विभाग खासमहाल की जमीन पर रह रहे लोगों से सीधा संवाद (विमर्श) स्थापित करेगा। इसके साथ ही इस विषय पर आए विभिन्न न्यायिक निर्णयों की भी गहन समीक्षा की जाएगी, ताकि भविष्य में कोई कानूनी अड़चन न आए।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि विमर्श और समीक्षा के बाद एक पारदर्शी नीति बनाई जाएगी। इस नीति के तहत यह तय किया जाएगा कि जमीन का मालिकाना हक देने के लिए वर्तमान बाजार मूल्य का कितना प्रतिशत शुल्क लोगों से लिया जाए। एक बार यह शुल्क राशि निर्धारित और जमा होने के बाद, खासमहाल की उस भूमि को फ्री होल्ड कर दिया जाएगा। फ्री-होल्ड होते ही वहां रह रहे लोग कानूनी रूप से उस जमीन के मालिक बन जाएंगे, जिससे वे अपनी संपत्ति का सुचारू रूप से उपयोग, हस्तांतरण या उसपर लोन ले सकेंगे। सरकार के इस कदम को बिहार में भूमि सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक और बड़ा गेम-चेंजर माना जा रहा है, जिससे शहरी क्षेत्रों में रहने वाले बड़े मध्यवर्गीय तबके को सीधा फायदा पहुंचेगा।













