तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को कहा बतोलेबाज मुख्यमंत्री, रिशु श्री मामले पर खूब गरजे, नीतीश को बताया भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखे वार किए और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह तक कह डाला। तेजस्वी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री बतोलेबाज हैं और उन्होंने 607 करोड़ के इमरजेंसी फंड की भी निकासी कर ली है।

तेजस्वी ने सम्राट चौधरी को कहा बतोलेबाज मुख्यमंत्री, रिशु श्री मामले पर खूब गरजे, नीतीश को बताया भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह

DESWA DESK : नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने आज राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर तीखे वार किए और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह तक कह डाला। तेजस्वी ने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री बतोलेबाज हैं और उन्होंने 607 करोड़ के इमरजेंसी फंड की भी निकासी कर ली है।

 बिहार की यह स्थिति लगातार हो रही घोटालों के कारण बनी है। बिहार में लगातार घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं और छोटे लोगों को फंसा कर मामला क्लोज कर दिया जाता है, जबकि बड़े लोगों तक जांच एजेंसिंया नहीं पहुंच पाती हैं। उन्होंने कहा कि चाहे टेंडर घोटाला हो या सृजन घोटाला, इसमें शामिल बड़े लोग नहीं पकड़े गए। तेजस्वी ने कहा कि रिशु श्री मामले में भी बड़े अधिकारी की संलिप्तता है, लेकिन उन्हें बचाने का प्रयास किया जा रहा है। 

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पूर्व सीएम नीतीश कुमार पर भी हमला बोला और उन्हें भ्रष्टाचार का भीष्म पितामह’करार दिया। दरअसल, तेजस्वी के केंद्र में रिशु श्री उर्फ रिशु रंजन सिन्हा है, जिसकी गिरफ्तारी ने बिहार के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। 39 वर्षीय रिशु श्री महज एक ठेकेदार नहीं, बल्कि कथित तौर पर एक हाई-प्रोफाइल टेंडर माफिया और बिचौलिया बनकर उभरा था। वह अपनी कंपनी रिलायबल इन्फ्रा सर्विसेज की आड़ में बड़ी कंपनियों और सरकारी तंत्र के बीच लाइजनिंग का काम करता था। रिशु बड़ी कंपनियों को टेंडर दिलाने के बदले टेंडर वैल्यू का पांच से सात प्रतिशत तक कमीशन वसूलता था। 

इस काली कमाई का दो से 3.5 प्रतिशत हिस्सा उन अधिकारियों को जाता था, जो फाइलों को मंजूरी देते थे। रिशु के पास से बरामद एक्सेल शीट में घूस की रकम को डिपार्टमेंटल एक्सपेंस के नाम से दर्ज किया गया था। रिशु ने पूछताछ में स्वीकार किया है कि यह पैसा अधिकारियों को दी जाने वाली घूस थी। बिहार पुलिस की विशेष निगरानी इकाई ने 27-28 मई की रात पटना के मीठापुर स्थित उसके आवास पर छापेमारी की। इस दौरान बरामदगी ने सबको चौंका दिया। ई़़डी की रिपोर्ट के मुताबिक, रिशु की कुल संपत्ति 265 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरते हुए कहा कि छोटे लोगों को फंसाकर असली मास्टरमाइंड को बचाया जा रहा है। सृजन घोटाले की तरह इस बार भी बड़े अधिकारी और सीएमओ तक के तार जुड़े हैं। तेजस्वी ने दो आईएएस अधिकारियों के निलंबन पर सवाल उठाते हुए पूछा कि उनका नाम चार्जशीट से क्यों हटाया गया? उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार के चंद अधिकारी एक सिंडिकेट चला रहे हैं और डीके टैक्स का कब्जा अब भी बरकरार है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भ्रष्टाचार का संरक्षक बताते हुए कहा कि रिशु श्री तो सिर्फ एक छोटी सी झलकी है, असली खेल तो ऊपर से हो रहा है।

रिशु श्री की गिरफ्तारी के बाद अब उस पर प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट और प्रवर्तन निदेशालय  ने मनी लॉन्ड्रिंग के तहत मामला दर्ज किया है। फिलहाल वह न्यायिक हिरासत में बेउर जेल में बंद है। इस गिरफ्तारी ने बिहार के टेंडर मैनेजमेंट सिस्टम में व्याप्त भ्रष्टाचार की परतें खोल दी हैं, जिससे आने वाले दिनों में और कई बड़े अधिकारियों के नप जाने की आशंका जताई जा रही है। अब सवाल यह है कि क्या रिशु श्री की गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार की जड़ें कटेंगी, या यह महज एक औपचारिकता बनकर रह जाएगी? यह जांच का विषय है, लेकिन एक बात साफ है कि रिशु की डिजिटल डायरी ने बिहार के प्रशासनिक ढांचे में ईमानदारी के दावों पर बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर दिया है।