टेंडर घोटाला : आईएएस अभिलाषा और योगेश सागर पर सीधे संलिप्तता के सबूत नहीं, संजीव हंस होंगे गिरफ्तार !
आने वाले दिनों में एसवीयू दोनों अधिकारियों को तीसरी बार नोटिस भेजने या सीधे बयान दर्ज करने की तैयारी में है। वहीं, फरार आईएएस संजीव हंस की संपत्तियों की कुर्की और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों को पड़ोसी राज्यों में भी रवाना किया गया है। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे के बाद से हलचल तेज हो गई है।
DESWA DESK : बिहार के बहुचर्चित टेंडर घोटाले की जांच कर रही विशेष निगरानी इकाई (एसवीयू) ने इस पूरे मामले में नामजद नौकरशाहों की भूमिका को लेकर स्थिति स्पष्ट कर दी है। एसवीयू ने साफ किया है कि आईएएस अधिकारी अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर के खिलाफ टेंडर घोटाले में सीधे तौर पर शामिल होने के पर्याप्त साक्ष्य फिलहाल नहीं मिले हैं। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की रिपोर्ट के आधार पर दोनों अधिकारियों पर एक 'निजी व्यक्ति' से अनुचित लाभ उठाने का गंभीर आरोप है, जिसकी गहराई से जांच की जा रही है। इसी आरोप के मद्देनजर राज्य सरकार ने दोनों को पहले ही निलंबित कर दिया था।
दूसरी ओर इस पूरे घोटाले के मुख्य चेहरों में से एक चर्चित आईएएस अधिकारी संजीव हंस अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर हैं। एसवीयू ने स्पष्ट कर दिया है कि संजीव हंस अभी फरार हैं और जांच एजेंसियां उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार जाल बिछा रही हैं। एसवीयू के एडीजी पंकज कुमार दाराद ने एक इस हाई-प्रोफाइल मामले के नए कड़ियों का खुलासा किया। एडीजी ने बताया कि ईडी ने इस मामले की तफ्तीश के दौरान मुख्य आरोपियों में से एक रिशुश्री समेत कई अन्य पदाधिकारियों के विस्तृत बयान दर्ज किए थे।
ईडी द्वारा दर्ज किए गए बयानों में ही आईएएस अभिलाषा कुमारी शर्मा और योगेश कुमार सागर के नामों का पहली बार खुलासा हुआ था। इन बयानों में रिशुश्री और अन्य बिचौलियों के जरिए दोनों अधिकारियों को निजी लाभ पहुंचाने के पुख्ता दावे किए गए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन आरोपों के सामने आने के बाद एसवीयू ने दोनों आईएएस अधिकारियों को दो बार आधिकारिक नोटिस भेजकर पूछताछ के लिए तलब किया था। हालांकि कुछ अपरिहार्य कारणों और प्रशासनिक वजहों से उनसे आमने-सामने की पूछताछ अब तक नहीं हो सकी है।
पूछताछ में हो रही देरी और आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एसवीयू ने कानूनी रुख अख्तियार किया। विशेष अदालत से बकायदा वारंट और अनुमति लेने के बाद दोनों अधिकारियों के आधिकारिक और निजी आवासों पर एक साथ छापेमारी की गई थी। हालांकि, एसवीयू सूत्रों के अनुसार, इस तलाशी अभियान के दौरान जांच टीम को कोई बहुत बड़ी बरामदगी नहीं हुई है, जिसके आधार पर सीधे टेंडर प्रक्रिया में उनकी संलिप्तता तय की जा सके।
फिलहाल, आईएएस संजीव हंस फरार हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए एसवीयू की टीम छापेमारी कर रही है। एसवीयू के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, भले ही सीधे टेंडर पास कराने या सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने के सीधे सबूत इन दोनों अधिकारियों के खिलाफ न मिले हों, लेकिन लोक सेवक रहते हुए किसी निजी व्यक्ति या बिचौलिए से लाभ उठाना भी भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर अपराध है।
आने वाले दिनों में एसवीयू दोनों अधिकारियों को तीसरी बार नोटिस भेजने या सीधे बयान दर्ज करने की तैयारी में है। वहीं, फरार आईएएस संजीव हंस की संपत्तियों की कुर्की और उनकी गिरफ्तारी के लिए विशेष टीमों को पड़ोसी राज्यों में भी रवाना किया गया है। बिहार के प्रशासनिक गलियारों में इस खुलासे के बाद से हलचल तेज हो गई है।













