ट्रेनों में नो रूम, BSRTC बसों ने मारी बाज़ी! 73 हजार यात्रियों का रिकॉर्ड सफर
त्योहारी सीजन आते ही हर साल की तरह इस बार भी ट्रेनों में ‘नो रूम’ का बोर्ड लग गया। कंफर्म टिकट के लिए लंबी कतारें और मारामारी देखने को मिली। लेकिन इस बार प्रवासी मजदूरों और यात्रियों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की बस सेवा।दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से बिहार लौटने वाले लाखों लोगों के लिए इस बार का सफर न सिर्फ आसान....
त्योहारी सीजन आते ही हर साल की तरह इस बार भी ट्रेनों में ‘नो रूम’ का बोर्ड लग गया। कंफर्म टिकट के लिए लंबी कतारें और मारामारी देखने को मिली। लेकिन इस बार प्रवासी मजदूरों और यात्रियों के लिए एक बड़ा सहारा बनकर उभरी बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (BSRTC) की बस सेवा।दिल्ली, पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों से बिहार लौटने वाले लाखों लोगों के लिए इस बार का सफर न सिर्फ आसान रहा, बल्कि जेब पर भी हल्का पड़ा। आंकड़े बताते हैं कि पिछले एक महीने में बिहार की अंतरराज्यीय बस सेवाओं ने ऐसा रिकॉर्ड बनाया है, जिसने रेलवे की भीड़ को सीधी चुनौती दे दी।
29 हजार से अधिक यात्रियों ने सरकारी बसों को चुना
निगम की 118 हाई-टेक एसी सीटर और स्लीपर बसों ने इस दौरान शानदार प्रदर्शन किया। 23 फरवरी से 23 मार्च के बीच 73 हजार से ज्यादा यात्रियों ने इन बसों में सफर किया। खास बात यह रही कि बसों की औसत ऑक्युपेंसी 94 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो इनकी बढ़ती लोकप्रियता का साफ संकेत है।सबसे ज्यादा भीड़ दिल्ली-मुजफ्फरपुर रूट पर देखने को मिली, जहां अकेले 29 हजार से अधिक यात्रियों ने सरकारी बसों को चुना। इसके अलावा दरभंगा-गुरुग्राम और गया-दिल्ली जैसे लंबे रूटों पर भी यात्रियों की संख्या हजारों में रही।
बड़े शहरों तक सीमित नहीं
यह सेवा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रही। पूर्णिया-दिल्ली रूट पर 5,440 और दरभंगा-पानीपत रूट पर करीब 5,000 यात्रियों ने सफर किया। वहीं गुरुग्राम-पूर्णिया, अंबाला-दरभंगा और पटना-दिल्ली जैसे रूटों पर भी इन बसों ने लोगों को बड़ी राहत दी।बिहार सरकार की इस पहल ने दोहरा फायदा दिया—एक तरफ प्रवासियों को समय पर घर पहुंचने में मदद मिली, तो दूसरी तरफ रेलवे पर बढ़ते दबाव को भी काफी हद तक कम किया गया।
बसों का किराया ट्रेनों के मुकाबले काफी सस्ता
सबसे बड़ी बात यह रही कि BSRTC की बसों का किराया ट्रेनों के मुकाबले काफी सस्ता रहा। यही वजह है कि खासकर प्रवासी कामगारों के लिए यह सेवा किसी वरदान से कम नहीं साबित हुई।निगम के अधिकारियों के मुताबिक, आसान बुकिंग, आरामदायक सफर और किफायती किराया—इन तीन वजहों ने लोगों को बसों की ओर आकर्षित किया। यही कारण है कि इस त्योहारी सीजन में BSRTC बसें यात्रियों की पहली पसंद बन गईं।













