राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उठाया 28 दिन वाले मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा, टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल

मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों के प्रीपेड रिचार्ज सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खासकर 28 दिन वाले मंथली प्लान और रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद होने के मुद्दे को उन्होंने आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बताया है। राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा....

राघव चड्ढा ने राज्यसभा में उठाया 28 दिन वाले मोबाइल रिचार्ज का मुद्दा, टेलीकॉम कंपनियों पर सवाल

मोबाइल रिचार्ज प्लान को लेकर देशभर में नई बहस छिड़ गई है। राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा ने टेलीकॉम कंपनियों के प्रीपेड रिचार्ज सिस्टम पर गंभीर सवाल उठाए हैं। खासकर 28 दिन वाले मंथली प्लान और रिचार्ज खत्म होते ही इनकमिंग कॉल बंद होने के मुद्दे को उन्होंने आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बताया है। राज्यसभा में बोलते हुए राघव चड्ढा ने कहा कि देश में करीब 125 करोड़ मोबाइल यूजर्स हैं, जिनमें से लगभग 90 फीसदी प्रीपेड यूजर्स हैं। ऐसे में टेलीकॉम कंपनियों की रिचार्ज नीति सीधे तौर पर करोड़ों लोगों को प्रभावित करती है।

दो बड़ी समस्याओं की ओर ध्यान
उन्होंने दो बड़ी समस्याओं की ओर ध्यान दिलाया। पहली समस्या यह है कि रिचार्ज खत्म होते ही कई बार सिर्फ आउटगोइंग ही नहीं बल्कि इनकमिंग कॉल भी बंद हो जाती है। आज के दौर में मोबाइल नंबर सिर्फ बातचीत का जरिया नहीं रहा, बल्कि बैंकिंग ओटीपी, सरकारी योजनाओं की जानकारी, नौकरी से जुड़े कॉल और डिजिटल पेमेंट जैसी जरूरी सेवाओं से भी जुड़ा है। ऐसे में इनकमिंग कॉल बंद होना आम लोगों के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी कर सकता है।

 यूजर्स को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है
दूसरा मुद्दा 28 दिन के मंथली रिचार्ज प्लान का है। सांसद का कहना है कि साल में 12 महीने होते हैं, लेकिन 28 दिन के प्लान के कारण यूजर्स को साल में 13 बार रिचार्ज कराना पड़ता है। अगर गणित लगाएं तो 28 × 13 = 364 दिन होते हैं। उनका कहना है कि कंपनियां ग्राहकों को ‘मंथली’ का एहसास देती हैं, लेकिन असल में प्लान 28 दिन का होता है, जिससे साल में एक अतिरिक्त रिचार्ज करवाना पड़ता है।उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया के ज्यादातर देशों में बिलिंग कैलेंडर मंथ यानी 30 या 31 दिन के आधार पर होती है। चाहे वह सैलरी, किराया, बैंक ईएमआई, बिजली-पानी या गैस का बिल हो—सब कुछ महीने के हिसाब से चलता है, लेकिन टेलीकॉम कंपनियां 28 दिन का सिस्टम अपनाती हैं।

सरकार और कंपनियों से मांग
राघव चड्ढा ने सरकार और टेलीकॉम कंपनियों से अपील की है कि रिचार्ज प्लान को ज्यादा पारदर्शी और यूजर-फ्रेंडली बनाया जाए। उनका सुझाव है कि मोबाइल रिचार्ज भी 31 दिन या कैलेंडर मंथ के आधार पर होना चाहिए, ताकि लोगों को साल में अतिरिक्त रिचार्ज कराने की मजबूरी न हो और आर्थिक बोझ भी कम हो। वहीं इस मुद्दे को उठाए जाने के बाद सोशल मीडिया पर भी बहस तेज हो गई है। कई यूजर्स ने टेलीकॉम कंपनियों की नीति पर सवाल उठाते हुए #MobileRechargeLoot जैसे हैशटैग ट्रेंड करने शुरू कर दिए हैं।