मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला; सबूतों के अभाव में पूर्व मेयर समीर और उनकी ड्राइवर की मर्डर के सभी आरोपी बरी

घटना 23 सितंबर 2018 की शाम की है, जब नगर थाना क्षेत्र के नवाब रोड चंदवारा के पास बाइक सवार अपराधियों ने एके-47 से पूर्व मेयर समीर कुमार की कार पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी थी। कुछ ही सेकंडों में एके-47 की दर्जनों गोलियों से पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर रोहित कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। पुलिस जांच में इस वारदात के पीछे कल्याणी स्थित बेशकीमती जमीन डीलिंग के विवाद और व्यावसायिक रंजिश को मुख्य वजह बताया गया था।

मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में बड़ा फैसला; सबूतों के अभाव में पूर्व मेयर समीर और उनकी ड्राइवर की मर्डर के सभी आरोपी बरी

DESWA DESK : मुजफ्फरपुर के पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके कार चालक रोहित कुमार की हत्या मामले में अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्वेता कुमारी सिंह की अदालत ने गुरूवार को साक्ष्यों और सबूतों के अभाव में पहले सेशन ट्रायल के सभी आरोपियों को बरी कर दिया है। करीब आठ साल पुराने इस हाईप्रोफाइल मामले में फैसला आते ही पूरे प्रशासनिक और राजनीतिक महकमे में हलचल मच गई है। 

घटना 23 सितंबर 2018 की शाम की है, जब नगर थाना क्षेत्र के नवाब रोड चंदवारा के पास बाइक सवार अपराधियों ने एके-47 से पूर्व मेयर समीर कुमार की कार पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी थी। कुछ ही सेकंडों में एके-47 की दर्जनों गोलियों से पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके ड्राइवर रोहित कुमार की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। पुलिस जांच में इस वारदात के पीछे कल्याणी स्थित बेशकीमती जमीन डीलिंग के विवाद और व्यावसायिक रंजिश को मुख्य वजह बताया गया था।

प्रथम सेशन ट्रायल में कोर्ट ने सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया है। बरी होने वालों में मृत्युंजय कुमार उर्फ पिंटू सिंह, रणंजय कुमार ओंकार, सुशील छापड़िया, नवीन कुमार, श्यामनंदन मिश्र और सुजीत कुमार शामिल हैं।
अदालत का रुख स्पष्ट था कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ ऐसे ठोस साक्ष्य पेश करने में नाकाम रहा जो उनके अपराध को संदेह से परे साबित कर सकें। पीड़ित पक्ष के वकीलों और परिजनों ने पुलिस की लचर जांच प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 

वकीलों का आरोप है कि घटना के वक्त समीर कुमार के पास से मिले मोबाइल फोन और अन्य तकनीकी सबूतों की सही तरीके से वैज्ञानिक जांच नहीं की गई, जिसकी वजह से केस कमजोर पड़ा। इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच के दौरान पुलिस ने कुल 12 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। मामले में दो अलग.अलग सेशन ट्रायल चल रहे हैं। पहला सेशन ट्रायल में छह आरोपियों को अदालत ने बरी किया है। वहीं, दूसरे सेशन ट्रायल में हाल ही में पूर्व मेयर के बेटे तुषार भारद्वाज ने पांचवें गवाह के रूप में अपनी गवाही दर्ज कराई है।

गौरतलब है कि जांच के दौरान जिन आरोपियों के नाम सामने आए थे उनमें से दो आरोपियों गोविंद शर्मा की हाल में गैंगवार में हत्या कर दी गई थी, जबकि आशुतोष शाही की भी हत्या हो चुकी है, और उनकी हत्या का आरोप गोविंद पर लगा था। पहले सेशन ट्रायल में सभी आरोपियों के बरी होने के बाद अब परिजनों की निगाहें दूसरे ट्रायल और हाईकोर्ट में अपील करने के विकल्प पर टिकी हुई हैं।