पटना में अंतिम संस्कार अब महंगा : 90 करोड़ से चमके बांस घाट का संचालन संभालेगी ईशा फाउंडेशन, दरें सुन भड़का राजद..

राजधानी पटना का ऐतिहासिक बांस घाट श्मशान अब पूरी तरह हाईटेक और अत्याधुनिक हो गया है, लेकिन बिहार की सियासत का नया अखाड़ा भी बन चुका है। सरकार ने 90 करोड़ की भारी-भरकम लागत से इस श्मशान घाट का कायाकल्प किया है, जिसके संचालन का जिम्मा आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को सौंपा गया है। इस फैसले के बाद जहां एक तरफ सुविधाओं की चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ अंतिम संस्कार के भारी-भरकम खर्च और जमीन आवंटन को लेकर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

पटना में अंतिम संस्कार अब महंगा : 90 करोड़ से चमके बांस घाट का संचालन संभालेगी ईशा फाउंडेशन, दरें सुन भड़का राजद..

DESWA DESK : राजधानी पटना का ऐतिहासिक बांस घाट श्मशान अब पूरी तरह हाईटेक और अत्याधुनिक हो गया है, लेकिन बिहार की सियासत का नया अखाड़ा भी बन चुका है। सरकार ने 90 करोड़ की भारी-भरकम लागत से इस श्मशान घाट का कायाकल्प किया है, जिसके संचालन का जिम्मा आध्यात्मिक गुरु जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को सौंपा गया है। इस फैसले के बाद जहां एक तरफ सुविधाओं की चर्चा है, वहीं दूसरी तरफ अंतिम संस्कार के भारी-भरकम खर्च और जमीन आवंटन को लेकर मुख्य विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।

सरकार का दावा है कि इस परियोजना का उद्देश्य आम जनता को एक सम्मानजनक, स्वच्छ और व्यवस्थित अंतिम संस्कार की सुविधा मुहैया कराना है। नए श्मशान घाट में एक साथ 18 शवों के दाह संस्कार की अत्याधुनिक व्यवस्था है। अंतिम यात्रा में शामिल होने वाले परिजनों और शुभचिंतकों के बैठने के लिए दो वातानुकूलित (एसी) वेटिंग हॉल बनाए गए हैं। प्रदूषण को कम करने के लिए आधुनिक गैस और इलेक्ट्रिक क्रिमेटोरियम के साथ-साथ व्यवस्थित लकड़ी की भी व्यवस्था है।

चकाचौंध और आधुनिक सुविधाओं के बीच इस घाट पर अंतिम संस्कार करना आम आदमी की जेब पर भारी पड़ने वाला है। बांस घाट पर अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को 3500 से 5000 तक खर्च करने होंगे। इसके विपरीत, पटना के ही अन्य सरकारी घाटों (जैसे दीघा, गुलबी और खाजेकलां) पर अंतिम संस्कार के लिए मात्र 300 की सरकारी रसीद कटती है।
आरोप है कि 3500 के इस बेस प्राइज के अलावा लकड़ी, बिजली या गैस के इस्तेमाल का अतिरिक्त खर्च अलग से देना पड़ सकता है।

विवाद सिर्फ संचालन सौंपने तक सीमित नहीं है। बिहार सरकार पटना के दीघा और मुंगेर के तारापुर में महज एक रुपये की टोकन लीज पर कुल 17 एकड़ जमीन भी ईशा फाउंडेशन को देने जा रही है। दीघा श्मशान घाट के आधुनिकीकरण और विकास की जिम्मेदारी भी दी जाएगी। इसके अलावा तारापुर (मुंगेर) में संस्था को लगभग 15 एकड़ जमीन मिलने वाली है, जहां बड़े स्तर पर पर्यावरण, ध्यान या श्मशान प्रबंधन से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम होने की उम्मीद है।

इस पूरे फैसले को लेकर राजद ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सोशल मीडिया पर एक बेहद आक्रामक पोस्ट साझा करते हुए राजद ने इस फैसले को 'जनता के पैसे की लूट' करार दिया है। राजद ने अपने बयान में कहा है कि 'आपका वोट चुराकर बनी, बेईमानों और अपराधियों की लुटेरी चंदा चोर पार्टी बीजेपी की एनडीए सरकार बिहारियों के जिंदा रहने पर ही नहीं बल्कि मरने पर भी आपके परिजनों की जेब काटेगी। बिहार के पटना के बांसघाट में जनता के सरकारी पैसे 89 करोड़ रुपये की लागत से बने नए श्मशान घाट को जग्गी वासुदेव की संस्था ईशा फाउंडेशन को मात्र एक रुपये की लीज पर दे दिया गया है।'

राजद ने आगे सवाल उठाया कि बिहार में तमिलनाडु की एक प्राइवेट संस्था को सरकारी संसाधन क्यों सौंपे जा रहे हैं? विपक्ष का आरोप है कि चंदा चोर पार्टी ने जनता के टैक्स के पैसे से बनी सरकारी संपत्तियों को अपने चहेते निजी हाथों में सौंपना शुरू कर दिया है, जिससे अब गरीबों के लिए अपनों का अंतिम संस्कार करना भी दूभर हो जाएगा। एक तरफ जहां सरकार इसे 'सम्मानजनक अंतिम संस्कार' और 'बेहतर प्रबंधन' की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसे 'श्मशान का निजीकरण' और 'गरीब विरोधी' नीति बताकर घेर रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा बिहार की राजनीति में और गरमा सकता है।