पैरवी और जुगाड़ तंत्र पर डीएम का बड़ा प्रहार, 400 से अधिक कर्मियों का एक साथ तबादला, सात जुलाई तक करना होगा योगदान

जिले के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी की गई है। जिलाधिकारी की इस कड़क कार्रवाई से न केवल भ्रष्ट और शिथिल व्यवस्था को एक कड़ा संदेश गया है, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासन की छवि और मजबूत हुई है।

पैरवी और जुगाड़ तंत्र पर डीएम का बड़ा प्रहार, 400 से अधिक कर्मियों का एक साथ तबादला, सात जुलाई तक करना होगा योगदान

DESWA DESK : कटिहार जिले के प्रशासनिक गलियारे में पैरवी और जुगाड़ के दम पर सालों से एक ही मलाईदार सीट पर जमे सुविधाभोगी सरकारी कर्मचारियों के एकाधिकार को जिलाधिकारी (डीएम) आशुतोष द्विवेदी ने पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। जिलाधिकारी ने व्यापक स्तर पर कार्रवाई करते हुए विभिन्न कार्यालयों और विभागों के लिपिक (क्लर्क), सहायक और परिचारी (चतुर्थवर्गीय कर्मी) समेत चार सौ से अधिक कर्मियों का एक झटके में स्थानांतरण कर दिया है।

जिले के इतिहास में संभवतः यह पहली बार है जब इतने बड़े पैमाने पर प्रशासनिक सर्जरी की गई है। जिलाधिकारी की इस कड़क कार्रवाई से न केवल भ्रष्ट और शिथिल व्यवस्था को एक कड़ा संदेश गया है, बल्कि आम जनता के बीच प्रशासन की छवि और मजबूत हुई है। जिलाधिकारी ने इस स्थानांतरण को केवल कागजी आदेश तक सीमित नहीं रखा है, बल्कि इसके क्रियान्वयन के लिए कड़ा रुख अपनाया है। आदेश के मुताबिक सभी स्थानांतरित कर्मियों को सात जुलाई तक अनिवार्य रूप से विरमित होने का निर्देश दिया गया है।

 तय समय सीमा के भीतर पदभार न छोड़ने की स्थिति में संबंधित कर्मी को उस तिथि से स्वतः विरमित मान लिया जाएगा।  प्रतिनियुक्ति के सहारे मलाईदार जगहों पर जमे रहने वाले विशेष कर्मियों पर भी गाज गिरी है, जिससे पूरे महकमे में हड़कंप का माहौल है। इस बड़ी कार्रवाई को लेकर जिला प्रशासन का कहना है कि यह कोई रूटीन ट्रांसफर नहीं, बल्कि एक नई प्रशासनिक पहल है। इसके तहत जिला स्तर पर पहली बार कर्मियों के कार्य, ईमानदारी और सक्रियता के आधार पर एक कार्यकुशलता रैंकिंग तैयार की गई थी। इसी पद्धति के आधार पर ही तबादले की सूची फाइनल की गई है। 

प्रशासन का मानना है कि इस व्यवस्था से पारदर्शिता आएगी, कर्मियों की कार्यकुशलता में सुधार होगा और उन्हें काम करने की नई ऊर्जा मिलेगी। जिले के कई विभागों में सालों से जमे कुछ बाबू (लिपिक) स्थानीय स्तर पर एक मजबूत नेटवर्क बना चुके थे, जिससे आम जनता के काम समय पर नहीं होते थे और भ्रष्टाचार की शिकायतें आम थीं। जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी ने इन सभी कर्मियों की 'कुंडली' खंगालकर उनके रसूख को खत्म कर दिया है। इस साहसिक कदम से आम नागरिकों में जिला प्रशासन के प्रति विश्वास काफी गहरा हुआ है।