बिहार में 2027 के अंत में ही हो सकेंगे पंचायत चुनाव, 35 साल बाद हो रहा परिसीमन बनी बड़ी वजह
बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लाखों जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में पंचायत चुनाव अब अगले साल यानी 2027 के अंत तक ही संभव हो पाएंगे। चुनाव में इस संभावित देरी का सबसे मुख्य कारण 35 साल बाद कराया जा रहा पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन है। तय समय पर चुनाव न होने की स्थिति में दिसंबर 2026 के बाद मौजूदा 'गांव की सरकार' भंग हो जाएगी और मुखिया-सरपंच समेत सभी जनप्रतिनिधियों को अपना पद छोड़ना पड़ेगा।
DESWA DESK : बिहार में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लाखों जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के लिए बड़ी खबर है। राज्य में पंचायत चुनाव अब अगले साल यानी 2027 के अंत तक ही संभव हो पाएंगे। चुनाव में इस संभावित देरी का सबसे मुख्य कारण 35 साल बाद कराया जा रहा पंचायतों का नए सिरे से परिसीमन है। तय समय पर चुनाव न होने की स्थिति में दिसंबर 2026 के बाद मौजूदा 'गांव की सरकार' भंग हो जाएगी और मुखिया-सरपंच समेत सभी जनप्रतिनिधियों को अपना पद छोड़ना पड़ेगा।
बिहार में पंचायतों का आखिरी परिसीमन 1993-94 में 1991 की जनगणना के आधार पर हुआ था। उस समय झारखंड भी बिहार का हिस्सा था और कुल आबादी 8.63 करोड़ थी। 2000 में झारखंड अलग होने के बाद बिहार की आबादी 6.45 करोड़ रह गई थी, जो बिहार जातीय गणना-2023 की रिपोर्ट के अनुसार बढ़कर अब 13.2 करोड़ पहुंच चुकी है। लंबे समय से परिसीमन न होने के कारण वर्तमान में लगभग 20 हजार की आबादी पर एक मुखिया का क्षेत्र आ रहा है, जिससे प्रशासनिक संचालन और विकास कार्यों में व्यावहारिक दिक्कतें आ रही हैं।
इसी असंतुलन को दूर करने के लिए सम्राट कैबिनेट ने 15 जुलाई को पंचायतों के नए परिसीमन को हरी झंडी दी थी। इसके बाद पंचायती राज विभाग के आदेश पर अब राज्य निर्वाचन आयोग 2011 की जनगणना को आधार बनाकर परिसीमन का कार्य कर रहा है, जिसके जुलाई 2027 तक पूरा होने की संभावना है। पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने स्पष्ट किया है कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही चुनाव की आगे की संवैधानिक प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
कई जनप्रतिनिधियों में भ्रम है कि चुनाव टलने पर वे पद पर बने रहेंगे, लेकिन संवैधानिक प्रावधान इसे पूरी तरह खारिज करते हैं। संविधान के प्रावधान और बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 यह स्पष्ट करता है कि ग्राम पंचायत की अवधि किसी भी हाल में पांच साल से एक भी दिन अधिक नहीं बढ़ाई जा सकती। साल 2021 में कोरोना की दूसरी लहर के दौरान जब पंचायत चुनाव टले थे, तब उस समय नीतीश कुमार की सरकार ने कानूनी अध्यादेश लाकर विशेष व्यवस्था की थी। सरकार ने पंचायती राज अधिनियम में संशोधन कर चुनाव होने तक 'परामर्शी समितियों' का गठन किया था। इस बार भी दिसंबर 2026 के बाद यही व्यवस्था लागू होने की पूरी संभावना है।













