'मंथली' का बेखौफ धंधा : 'सिस्टम' को आंख दिखातीं ओवरलोड गाड़ियां, DM-SP का भी डर नहीं..वसूली के खेल में परिवहन विभाग मेहरबान
कटिहार जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर दौड़ने वाले ओवरलोड वाहनों का राज है। डीएम और एसपी के सख्त निर्देश को ठेंगा दिखाते हुए जिले में ओवरलोडिंग का 'मंथली' खेल धड़ल्ले से फलफूल रहा है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर गिट्टी, बालू और अन्य सामग्रियां ले जा रहे ये ओवरलोड वाहन खुलेआम 'सिस्टम' को आंख दिखा रहे हैं और इस पूरे खेल पर परिवहन विभाग के अधिकारी मेहरबान नजर आ रहे हैं।
DESWA DESK : कटिहार जिले की लाइफलाइन कही जाने वाली सड़कों पर इन दिनों नियमों को ताक पर रखकर दौड़ने वाले ओवरलोड वाहनों का राज है। डीएम और एसपी के सख्त निर्देश को ठेंगा दिखाते हुए जिले में ओवरलोडिंग का 'मंथली' खेल धड़ल्ले से फलफूल रहा है। आलम यह है कि नियमों को ताक पर रखकर गिट्टी, बालू और अन्य सामग्रियां ले जा रहे ये ओवरलोड वाहन खुलेआम 'सिस्टम' को आंख दिखा रहे हैं और इस पूरे खेल पर परिवहन विभाग के अधिकारी मेहरबान नजर आ रहे हैं।
स्थानीय सूत्रों और परिवहन क्षेत्र से जुड़े जानकारों की मानें तो जिले की सीमाओं और प्रमुख चेकपोस्टों पर प्रति माह होने वाली 'मंथली अवैध वसूली' का नेटवर्क इतना मजबूत हो चुका है कि इन गाड़ी मालिकों को अब पुलिस या प्रशासनिक कार्रवाई का कोई डर नहीं रह गया है। चर्चा है कि कटिहार में डीटीओ के प्रभार और कार्यप्रणाली को लेकर चल रही रस्साकशी के बीच जांच की प्रक्रिया पूरी तरह सुस्त पड़ गई है।
अधिकारियों की इस मेहरबानी और साठगांठ के कारण सड़कों पर सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। दिन के उजाले से लेकर रात के अंधेरे तक क्षमता से दोगुना माल लादे ओवरलोड ट्रक और डंपर सड़कों को समय से पहले बर्बाद कर रहे हैं, वहीं आए दिन होने वाले हादसों से राहगीरों की जान हमेशा सांसत में पड़ी रहती है।
ग्रामीणों और प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि जिले के एनएच और स्टेट हाईवे पर कभी-कभार ही दिखावे के लिए जांच अभियान चलाया जाता है। इस 'खानापूर्ति' वाली चेकिंग के जरिए बड़े कॉमर्शियल वाहनों को क्लीन चिट दे दी जाती है, जबकि असली खेल पर्दे के पीछे 'मंथली' के रूप में खेला जा रहा है। यही वजह है कि जिला स्तर पर प्रशासनिक सख्ती के दावों के बावजूद धरातल पर एक भी ओवरलोड गाड़ी पर लगाम कसती नहीं दिख रही है।
ओवरलोड वाहनों के इस बेखौफ संचालन के कारण कटिहार की प्रमुख सड़कें और पुल-पुलिया समय से पहले जर्जर हो रहे हैं। इसके साथ ही, इन गाड़ियों से उड़ने वाली धूल और अनियंत्रित रफ्तार के कारण जिले में सड़क हादसों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि आखिर डीएम और एसपी के आदेशों का परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस पर कोई असर क्यों नहीं हो रहा है?
क्या कटिहार जिला प्रशासन को इन ओवरलोड वाहनों के पीछे चल रहे बड़े सिंडिकेट की भनक नहीं है? नियमों का उल्लंघन करने वाले इन 'यमदूतों' पर आखिर परिवहन विभाग के अधिकारी कानूनी हंटर चलाने से क्यों कतरा रहे हैं? सड़कों पर आम जनता की सुरक्षा की बलि देकर चलने वाला यह 'मंथली का खेल' कब बंद होगा? अब देखना है कि इस गंभीर मामले के उजागर होने के बाद जिला मुख्यालय से लेकर पटना तक बैठे आला अधिकारी क्या कार्रवाई करते हैं।













