आरटीआई का उल्लंघन : कटिहार एडीटीओ संजीव कुमार सिंह की जानकारी दबा रहा परिवहन विभाग, देसवा न्यूज की एडीटर इन चीफ को पांच माह बाद भी जवाब नहीं
सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून को ताक पर रखकर बिहार परिवहन विभाग के अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं। ताजा मामला कटिहार के अतिरिक्त जिला परिवहन पदाधिकारी (एडीटीओ) सह पूर्व एमवीआई संजीव कुमार सिंह से जुड़ा है। उनके शैक्षणिक दस्तावेजों, चल-अचल संपत्ति और लाइसेंसी हथियार के इस्तेमाल से संबंधित मांगी गई जानकारी को विभाग दबाकर बैठा है।
DESWA DESK : सूचना के अधिकार (आरटीआई) कानून को ताक पर रखकर बिहार परिवहन विभाग के अधिकारी मनमानी पर उतारू हैं। ताजा मामला कटिहार के अतिरिक्त जिला परिवहन पदाधिकारी (एडीटीओ) सह पूर्व एमवीआई संजीव कुमार सिंह से जुड़ा है। उनके शैक्षणिक दस्तावेजों, चल-अचल संपत्ति और लाइसेंसी हथियार के इस्तेमाल से संबंधित मांगी गई जानकारी को विभाग दबाकर बैठा है।
देसवा न्यूज की ब्रांड एंबेसडर और एडिटर इन चीफ बबिता कुमारी ने 12 अप्रैल को लोक सूचना पदाधिकारी, परिवहन विभाग (विश्वेश्वरैया भवन, पटना) को आवेदन देकर एडीटीओ संजीव कुमार सिंह के संबंध में दस बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। आरटीआई कानून के तहत 30 दिनों के भीतर मांगी गई जानकारी उपलब्ध कराना अनिवार्य है, लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो कोई सूचना दी गई और न ही विभाग की ओर से कोई पत्राचार किया गया।
इन बिंदुओं पर मांगी गई थी रिपोर्ट :-
व्यक्तिगत विवरण : जन्म तिथि, शैक्षणिक योग्यता, तकनीकी योग्यता एवं निवास स्थान के प्रमाणपत्र की प्रति।
संपत्ति का ब्योरा: एमवीआई पद पर नियुक्ति के समय एवं उसके बाद प्रतिवर्ष विभाग को दी गई आय-संपत्ति विवरण की छाया प्रति।
कार्यक्षमता का रिकॉर्ड : नियुक्ति के बाद से अब तक विभाग द्वारा दिए गए वार्षिक लक्ष्य और उनके विरुद्ध की गई वास्तविक उपलब्धि।
हथियार का नियम: एडीटीओ के पास मौजूद आग्नेयास्त्र (पिस्तौल) का विवरण और क्या वाहन जांच के दौरान अपने लाइसेंसी पिस्टल के प्रयोग के लिए उन्होंने विभाग से लिखित अनुमति ली है?
वरिष्ठ पत्रकार और संपादक स्तर की आवेदिका को नियमानुसार सूचना न मिलना परिवहन विभाग की कार्यशैली और नीयत पर गंभीर सवाल खड़े करता है। आखिर ऐसा क्या राज है जिसे छुपाने के लिए विभागीय लोक सूचना अधिकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं? मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए आवेदिका बबिता कुमारी ने कहा कि जब एक मीडिया संस्थान की प्रमुख को सूचना के अधिकार के तहत तय समय सीमा में जानकारी नहीं मिल रही है, तो आम जनता की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है।
कटिहार एडीटीओ के ब्योरे को सार्वजनिक करने में विभाग को आखिर क्या डर सता रहा है? इस संबंध में अब प्रथम अपीलीय प्राधिकार का दरवाजा खटखटाने और राज्य सूचना आयोग में शिकायत दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है।













