नीतीश की विरासत पर घमासान : जेडीयू-बीजेपी के तेवर के बाद बैकफुट पर उपेंद्र कुशवाहा, बोले-निशांत और दीपक में कोई अंतर नहीं
सहयोगी दलों और जेडीयू के कड़े तेवर के बाद उपेंद्र कुशवाहा बैकफुट पर आते नजर आए। राजगीर में आयोजित आरएलएम के तीन दिवसीय विमर्श शिविर में बोलते हुए कुशवाहा ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि मैंने खून-पसीना बहाकर जेडीयू को सींचा है, इसलिए पार्टी की फिक्र मुझे भी रहती है। आज हमारी अलग राहें हो सकती हैं, लेकिन मेरे बेटे दीपक प्रकाश और नीतीश जी के बेटे निशांत कुमार में मेरे लिए कोई अंतर नहीं है।
DESWA DESK : मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत को लेकर बिहार के सियासी गलियारे में जुबानी जंग तेज हो गई है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा के बयान के बाद जेडीयू और बीजेपी ने पलटवार किया। जेडीयू के बिहार प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने तो यहां तक कह दिया कि कुशवाहा को अपनी पार्टी की चिंता करनी चाहिए और बेवजह का ख्याली पुलाव नहीं पकाना चाहिए।
सहयोगी दलों और जेडीयू के कड़े तेवर के बाद उपेंद्र कुशवाहा बैकफुट पर आते नजर आए। राजगीर में आयोजित आरएलएम के तीन दिवसीय विमर्श शिविर में बोलते हुए कुशवाहा ने अपनी स्थिति साफ की। उन्होंने कहा कि मैंने खून-पसीना बहाकर जेडीयू को सींचा है, इसलिए पार्टी की फिक्र मुझे भी रहती है। आज हमारी अलग राहें हो सकती हैं, लेकिन मेरे बेटे दीपक प्रकाश और नीतीश जी के बेटे निशांत कुमार में मेरे लिए कोई अंतर नहीं है।
उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि नीतीश सरकार ने बिहार में 65 फीसदी आरक्षण की व्यवस्था लागू करने का ऐतिहासिक फैसला किया था। अब आरएलएम इस व्यवस्था को बिहार में पुनः मजबूती से लागू करवाने के लिए संघर्ष करेगी। कुशवाहा ने कहा कि निशांत कुमार के राजनीतिक भविष्य और उन्हें आगे लाने की मांग सबसे पहले उन्होंने ही उठाई थी। निशांत बिहार के उज्ज्वल भविष्य हैं और उन पर उनका वही स्नेह है जो दीपक प्रकाश पर है।
वहीं, बिहार की वर्तमान शिक्षा प्रणाली में हो रहे बदलावों के लिए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के तालमेल से बड़ा सुधार दिख रहा है। उपेंद्र कुशवाहा ने कहा कि उनके और सम्राट चौधरी के बीच रिश्ते बेहद मधुर हैं और विरोधी केवल अफवाहें फैलाने का काम कर रहे हैं।
वहीं, पार्टी शिविर के दौरान कुशवाहा ने मांग रखी कि ऐतिहासिक गरिमा को ध्यान में रखते हुए राजधानी पटना का नाम आधिकारिक तौर पर बदलकर पाटलिपुत्र किया जाना चाहिए। साथ ही, गर्दनीबाग में अपनी मांगों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर रहे छात्रों के प्रति हमदर्दी जताते हुए उन्होंने सरकार से सकारात्मक बातचीत करने का सुझाव दिया। साथ ही कहा कि वे खुद भी छात्रों की बात सुनने गर्दनीबाग जा सकते हैं।













