औरंगाबाद में विजिलेंस का बड़ा एक्शन : 50 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ पकड़ा गया भ्रष्ट दारोगा, कभी नारियल पानी तो कभी पेड़ा...?
औरंगाबाद जिले के रिसियप थाने में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) उमेश कुमार को पटना विजिलेंस की टीम ने 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है। खाकी को दागदार करने वाले एसआई की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद गिरफ्तार दारोगा को टीम कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए अपने साथ पटना ले गई है।
DESWA DESK : औरंगाबाद जिले के रिसियप थाने में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर (एसआई) उमेश कुमार को पटना विजिलेंस की टीम ने 50 हजार की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया है। खाकी को दागदार करने वाले एसआई की गिरफ्तारी के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। निगरानी विभाग की इस कार्रवाई के बाद गिरफ्तार दारोगा को टीम कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए अपने साथ पटना ले गई है।
पूरा मामला तेंदुआ गणपत गांव का है, जहां नाली-गली को लेकर पिछले दो सालों से विवाद चल रहा था। पंचायत स्तर पर भी समझौते की कोशिशें नाकाम रही थीं। इसी विवाद में बीते 14 जुलाई को गांव के ही मदन राम और अन्य लोगों ने डॉ. लक्ष्मण राम पर जानलेवा हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया था। घटना के बाद डायल 112 की टीम ने घायल डॉ. लक्ष्मण राम को अस्पताल पहुंचाया। वहीं दूसरी तरफ से रंजीत राम की पत्नी रेशमी देवी ने भी थाने में काउंटर केस दर्ज करा दिया।
मामले की जांच की जिम्मेदारी एसआई उमेश कुमार को सौंपी गई थी। पीड़ित डॉ. लक्ष्मण राम का आरोप है कि जांच के दौरान एसआई लगातार उन पर दबाव बना रहे थे। हद तो तब हो गई जब थाने में मुलाकात के नाम पर कभी नारियल पानी तो कभी पेड़ा और आम मंगवाया जाता था। बात यहीं नहीं रुकी, रिश्वत न देने पर दारोगा ने पूरे परिवार और बच्चों को झूठे मामलों में फंसाकर जिंदगी बर्बाद करने की धमकी तक दे डाली।
दारोगा उमेश कुमार ने केस में राहत देने के एवज में डेढ़ लाख रूपये रिश्वत की मांग की थी। आरजू-मिन्नतें करने के बाद सौदा एक लाख में तय हुआ। शर्त यह रखी गई कि पहली किस्त के तौर पर 50 हजार तुरंत दिए जाएंगे और बाकी रकम काम होने के बाद। दारोगा की प्रताड़ना से तंग आकर डॉ. लक्ष्मण राम ने इसकी शिकायत पटना स्थित निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से कर दी। विभाग ने गुप्त रूप से शिकायत का सत्यापन कराया, जो बिल्कुल सच पाया गया।
इसके बाद विजिलेंस की टीम ने रणनीति बनाई और जैसे ही शिकायतकर्ता ने तय योजना के अनुसार एसआई उमेश कुमार को 50 हजार रूपये की पहली किस्त थमाई, आसपास सादे लिबास में तैनात निगरानी टीम ने उन्हें दबोच लिया। विजिलेंस की इस त्वरित और कड़ी कार्रवाई को पुलिस महकमे में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश माना जा रहा है। स्थानीय लोगों में इस कार्रवाई के बाद जहां राहत का माहौल है, वहीं इस घटना ने पुलिस की साख पर बड़ा सवाल खड़े कर दिए हैं।













