बिहार में बड़ा फेरबदल: भोजपुर, सिवान, छपरा समेत कई जिलों के एसपी बदले; 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला..देखें पूरी लिस्ट
राज्य सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य के 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। हालिया विवादों और घटनाओं से घिरे सिवान और भोजपुर जैसे जिलों के एसपी को हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कह रात ही में भोजपुर डीएम का भी तबादला किया गया था। सिवान के एसपी पूरन कुमार झा को हटा दिया गया है। उनकी जगह 2019 बैच के आईपीएस भारत सोनी को सिवान का नया एसपी बनाया गया है। भारत सोनी इससे पहले नालंदा में पदस्थापित थे। सिवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय को पहले ही हटाया जा चुका है। वहीं, भोजपुर के एसपी मिस्टर राज को रोहतास भेज दिया गया है। भोजपुर में प्रशासनिक कसावट लाते हुए सरकार ने तनय सुल्तानिया की जगह आईएएस मनोज कुमार मीणा को नया डीएम भी नियुक्त किया है।
DESWA DESK : राज्य सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा फेरबदल करते हुए राज्य के 17 आईपीएस अधिकारियों का तबादला कर दिया है। हालिया विवादों और घटनाओं से घिरे सिवान और भोजपुर जैसे जिलों के एसपी को हटाकर नए अधिकारियों की तैनाती की गई है। कह रात ही में भोजपुर डीएम का भी तबादला किया गया था।
सिवान के एसपी पूरन कुमार झा को हटा दिया गया है। उनकी जगह 2019 बैच के आईपीएस भारत सोनी को सिवान का नया एसपी बनाया गया है। भारत सोनी इससे पहले नालंदा में पदस्थापित थे। सिवान के डीएम विवेक रंजन मैत्रेय को पहले ही हटाया जा चुका है। वहीं, भोजपुर के एसपी मिस्टर राज को रोहतास भेज दिया गया है। भोजपुर में प्रशासनिक कसावट लाते हुए सरकार ने तनय सुल्तानिया की जगह आईएएस मनोज कुमार मीणा को नया डीएम भी नियुक्त किया है।
इसके साथ ही, 2017 बैच के आईपीएस विनीत कुमार को सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) पद से स्थानांतरित कर आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) में एसपी बनाया गया है। उनकी जगह 2019 बैच के आईपीएस रौशन कुमार छपरा के नए SSP होंगे। गृह विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, पुलिस उपमहानिरीक्षक (डीआईजी) स्तर के कई अधिकारियों की जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है। अनिल कुमार को डीआईजी वित्त एवं तकनीकी सेवाएं से स्थानांतरित कर डीआईजी मद्य निषेध एवं एनएनटीएफ बनाए गए हैं।
मृत्युंजय कुमार चौधरी अब डीआईजी निगरानी अन्वेषण ब्यूरो से अब डीआईजी (नागरिक सुरक्षा) के पद पर तैनात किए गए हैं। सरकार के इस फैसले को हाल की घटनाओं के मद्देनजर विधि-व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने और जिलों में प्रशासनिक कसावट लाने के बड़े कदम के रूप में देखा जा रहा है।













