पटना में ‘नगर नेत्र’ की एंट्री: AI कैमरों से होगी निगरानी, कचरा फेंकने पर कटेगा चालान
पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शहर को साफ-सुथरा और स्मार्ट बनाने के लिए ‘सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट’ लॉन्च करने का फैसला किया है।इस प्रोजेक्ट के तहत 19 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियां खरीदी जाएंगी, जिन्हें ‘नगर नेत्र’ नाम दिया गया..
पटना में अब खुले में कचरा फेंकना आपकी जेब पर भारी पड़ सकता है। क्योंकि शहर में सफाई व्यवस्था को लेकर एक बड़ा हाईटेक कदम उठाया जा रहा है। पटना स्मार्ट सिटी लिमिटेड ने शहर को साफ-सुथरा और स्मार्ट बनाने के लिए ‘सिविक सर्विसेज सर्विलांस एंड मॉनिटरिंग प्रोजेक्ट’ लॉन्च करने का फैसला किया है। इस प्रोजेक्ट के तहत अब कचरा फैलाने वालों पर ट्रैफिक नियमों की तरह कार्रवाई होगी।
‘नगर नेत्र’ नाम दिया गया है।
इस प्रोजेक्ट के तहत 19 इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियां खरीदी जाएंगी, जिन्हें ‘नगर नेत्र’ नाम दिया गया है। ये गाड़ियां AI आधारित 4K डैशकैम से लैस होंगी और 110 डिग्री वाइड एंगल में रिकॉर्डिंग करेंगी। ये वाहन पटना नगर निगम के सभी 75 वार्डों में लगातार गश्त करेंगे और सड़कों पर मौजूद समस्याओं की पहचान करेंगे।
हर वाहन में GPS सिस्टम
इसके अलावा ये गाड़ियां सड़कों पर कचरा, खुले मैनहोल, खराब स्ट्रीट लाइट और अवैध कब्जों की पहचान कर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेजेंगी ।हर वाहन में GPS सिस्टम लगा होगा, जिससे किसी भी समस्या की सटीक लोकेशन तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंचेगी।
हर वार्ड की सभी सड़कों की स्क्रीनिंग
ये गाड़ियां रोस्टर के आधार पर हर वार्ड की सभी सड़कों की स्क्रीनिंग करेंगी। इन इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर गाड़ियों को चार्ज करने के लिए आइसीसीसी (ICCC) या अन्य चिह्नित जगहों पर चार्जिंग हब भी बनाए जाएंगे। सड़कों पर दौड़ने वाली इन गाड़ियों से मिलने वाले डेटा का विश्लेषण करने के लिए ICCC भवन में एक 'सेंट्रल सिविक सर्विसेज ऑपरेशंससेंटर' (C-SOC) बनाया जाएगा। यहां लगे स्मार्ट AI इंजन कचरे के ढेर, सड़क के गड्डों, अवैध होर्डिंग्स और लावारिस पशुओं की पहचान करेगा।
स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट तैयार
अगर कहीं एक मीटर से बड़ा कचरे का ढेर या 10 इंच से बड़ा गड्डा मिलता है तो सिस्टम खुद उसका स्क्रीनशॉट लेकर रिपोर्ट तैयार कर देगा।यह सिस्टम इतना एडवांस होगा कि अवैध विज्ञापन मिलने पर संभावित चालान की राशि की गणना भी कर सकेगा। इससे नगर निगम के अधिकारियों को रियल टाइम डैशबोर्ड में समस्याओं के बारे में पता चलेगा।
पूरे प्रोजेक्ट पर 8.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे
पटना स्मार्ट सिटी के मुताबिक, इस पूरे प्रोजेक्ट पर 8.95 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसका मुख्य उद्देश्य तकनीक के जरिए नागरिक सुविधाओं को बेहतर करना है। हालांकि, प्रोजेक्ट के संचालन के लिए एक प्रोजेक्ट डायरेक्टर, 2 सिटी कोऑर्डिनेटर और 19 ड्राइवरों सहित कुल 27 लोगों की टीम तैनात रहेगी।इस प्रोजेक्ट को नवंबर 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
5G सिम और वाई-फाई तकनीक का उपयोग
वहीं, एजेंसी को अगले 36 महीनों तक एजेंसी द्वारा संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी दी जाएगी।डैशकैम से डेटा ट्रांसफर के लिए 5G सिम और वाई-फाई तकनीक का उपयोग होगा। इसके सफल होने के बाद दूसरे फेज में इसे ट्रैफिक पुलिस की गाड़ियों और नगर निगम के कचरा वाहनों से भी जोड़ने की योजना है।भविष्य में यह सिस्टम सड़क के किनारों के टूटे डिवाइडर, धुंधली पड़ चुकी रोड मार्किंग और टूटे हुए पेवर ब्लॉक की भी पहचान करेगा, ताकि नागरिक सुविधा में कोई कमी न आए। यानि साफ है—अब पटना में गंदगी फैलाना आसान नहीं होगा। टेक्नोलॉजी की नजर हर गतिविधि पर रहेगी, और नियम तोड़ने वालों को सीधे जुर्माना भरना पड़ेगा।













