मोकामा विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत,साक्ष्य के अभाव में बरी,दुलारचंद हत्याकांड में मुश्किलें बरकरार

मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को बुधवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट ने करीब 11 साल पुराने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में अनंत सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद अनंत सिंह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।पटना सिविल कोर्ट के एमपी-एमएलए मामलों की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी पंकज कुमार मालवीय की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान ...

मोकामा विधायक अनंत सिंह को बड़ी राहत,साक्ष्य के अभाव में बरी,दुलारचंद हत्याकांड में मुश्किलें बरकरार

मोकामा के बाहुबली विधायक अनंत सिंह को बुधवार को अदालत से बड़ी राहत मिली है। पटना सिविल कोर्ट ने करीब 11 साल पुराने 10 करोड़ रुपये की रंगदारी मांगने के मामले में अनंत सिंह को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। हालांकि, इस फैसले के बावजूद अनंत सिंह फिलहाल जेल से बाहर नहीं आ पाएंगे।पटना सिविल कोर्ट के एमपी-एमएलए मामलों की विशेष न्यायिक दंडाधिकारी पंकज कुमार मालवीय की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान अनंत सिंह को बेऊर जेल से विशेष अदालत में पेश किया गया था।

किस मामले में मिली राहत?
यह मामला वर्ष 2014 का है, जो श्रीकृष्णापुरी थाना क्षेत्र से जुड़ा हुआ था। प्राथमिकी के अनुसार, सूचक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने आरोप लगाया था कि बंटू सिंह समेत चार लोग उनके घर में जबरन घुस आए और धमकी दी कि मोकामा विधायक अनंत सिंह के लिए 10 करोड़ रुपये की रंगदारी पहुंचाई जाए।
पुलिस ने जांच के बाद अनंत सिंह और बंटू सिंह के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। लेकिन सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से केवल अनुसंधानकर्ता ही अदालत में गवाही दे सके। अन्य गवाहों के उपस्थित न होने और ठोस साक्ष्य के अभाव में अदालत ने दोनों आरोपितों को बरी कर दिया।

बंटू सिंह भी बरी
इस मामले में सह-आरोपी बंटू सिंह को भी अदालत ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया है। अनंत सिंह के अधिवक्ता सुनील कुमार ने बताया कि अभियोजन पक्ष आरोपों को प्रमाणित करने में विफल रहा।गौरतलब है कि अनंत सिंह फिलहाल दुलारचंद यादव हत्याकांड में बेऊर जेल में बंद हैं। यह मामला विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा के टाल इलाके में हुई हिंसक झड़प से जुड़ा है, जिसमें दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी।पटना के तत्कालीन एसएसपी कार्तिकेय शर्मा ने गिरफ्तारी के समय दावा किया था कि घटना के वक्त अनंत सिंह मौके पर मौजूद थे और जांच में इससे जुड़े साक्ष्य मिले हैं। इसी आधार पर उन्हें हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।बता दें कि अदालत से मिली यह राहत अनंत सिंह के लिए कानूनी और राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है, लेकिन दुलारचंद हत्याकांड में आगे क्या फैसला आता है, इस पर उनकी राजनीतिक भविष्य की दिशा तय होगी।