दस हजार रिश्वत लेते पकड़े गए सब-इंस्पेक्टर को दो साल की सजा, पटना निगरानी कोर्ट का फैसला, 20 हजार का जुर्माना भी लगा

भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत ने भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाने के तत्कालीन अवर निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) रामाशंकर सिंह को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पटना में निगरानी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि नहीं चुकाने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण जेल भुगतनी होगी।

दस हजार रिश्वत लेते पकड़े गए सब-इंस्पेक्टर को दो साल की सजा, पटना निगरानी कोर्ट का फैसला, 20 हजार का जुर्माना भी लगा

DESWA DESK : भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए पटना स्थित विशेष निगरानी अदालत ने भोजपुर जिले के उदवंतनगर थाने के तत्कालीन अवर निरीक्षक (सब-इंस्पेक्टर) रामाशंकर सिंह को दोषी ठहराते हुए दो वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। पटना में निगरानी विशेष न्यायालय के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने उन पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की अलग-अलग धाराओं के तहत कुल 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड की राशि नहीं चुकाने पर दोषी को तीन महीने की अतिरिक्त साधारण जेल भुगतनी होगी।

उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13 (1) (डी) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-23/2011 (विशेष वाद सं-21/2011) में दोषी ठहराया गया है। यह मामला वर्ष 2011 का है, जब आरोपी पुलिस अधिकारी को दस हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया था। अदालत के आदेश के अनुसार सजा की दोनों अवधि साथ-साथ चलेंगी। 

निगरानी अन्वेषण ब्यूरो द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, यह पूरा मामला वर्ष 2011 में उदवंतनगर थाना कांड संख्या 74/2011 से जुड़ा है। परिवादी अजीत कुमार सिंह ने निगरानी ब्यूरो में शिकायत दर्ज कराई थी कि तत्कालीन सब-इंस्पेक्टर रामाशंकर सिंह केस की धाराओं को यथावत रखने और अनुकूल केस डायरी तैयार करने के बदले दस हजार रुपये रिश्वत मांग रहे हैं।

शिकायत के सत्यापन के बाद निगरानी की टीम ने 15 अप्रैल 2011 को रामाशंकर सिंह को दस हजार रुपये घूस लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया था। मामले की जांच तत्कालीन डीएसपी गंगा राम ने पूरी कर समय पर अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक (निगरानी) किशोर कुमार सिंह ने अदालत में प्रभावी ढंग से पक्ष रखा। ठोस साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने आरोपी को दोषी पाया। 

निगरानी विभाग की ओर से जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि आज अतुल कुमार सिंह, न्यायाधीश, विशेष न्यायालय निगरानी, पटना द्वारा अभियुक्त रामाशंकर सिंह, तत्कालीन अवर निरीक्षक, उदवंतनगर थाना, जिला- भोजपुर को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 7, 13(2) सह पठित धारा 13 (1) (डी) के तहत निगरानी थाना कांड संख्या-23/2011 (विशेष वाद सं-21/2011) में दोषी ठहराया गया है। उन्हें भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा-7 में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। धारा-13 (2) सह पठित धारा-13(1) (डी) में दो वर्ष सश्रम कारावास एवं दस हजार रूपये का अर्थदण्ड लगाया गया है। अर्थदण्ड की राशि जमा नहीं करने पर तीन महीने का साधारण कारावास होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।